पति के साथ छोटी-छोटी बातों पर बहस बढ़ जाती है तो कुछ आसान तरीके अपनाकर इसे कम किया जा सकता है। जानें, बिना बात बढ़ाए अपनी बात कैसे रखें और रिश्ते में स्ट्रसे कैसे कम करें।
पति-पत्नी के बीच हर बात पर सहमत होना जरूरी नहीं है। अलग सोच, काम का तनाव, घर की जिम्मेदारियां और रोज की छोटी-छोटी परेशानियां कई बार बहस की वजह बन जाती हैं। ऐसे में जरूरी नहीं कि हर बार कोई एक व्यक्ति सही और दूसरा गलत हो। कई बार बात करने का तरीका बदलने से ही स्थिति बेहतर हो सकती है। अगर आप भी पति के साथ होने वाली छोटी बहस को बड़ा होने से रोकना चाहती हैं, तो इन कुछ बातों का ध्यान रखें।
- गुस्से में तुरंत जवाब ना दें
बहस के दौरान गुस्सा बहुत ज्यादा हो तो उसी समय जवाब देने से बात और बिगड़ सकती है। अगर आपको लग रहा है कि आप कुछ ऐसा कह देंगी जिसका बाद में पछतावा हो, तो थोड़ी देर चुप रहना बेहतर है।
- एक समय पर एक ही बात करें
कई बार एक छोटी बहस में पुरानी दस बातें भी निकल आती हैं। इससे समस्या का हल निकलने के बजाय दोनों एक-दूसरे को दोष देने लगते हैं। इसलिए जिस बात को लेकर परेशानी है, उसी पर बात करें।
- आरोप नहीं लगाना है
‘तुम कभी मेरी बात नहीं समझते’ या ‘तुम हमेशा ऐसा करते हो’ जैसे वाक्य सामने वाले को डिफेंस की स्थिति में ले आते हैं। इसके बजाय अपनी बात इस तरह कहें कि सामने वाले को आपकी परेशानी समझ आए। जैसे, ‘जब ऐसा होता है तो मुझे बुरा लगता है।’ इससे बातचीत लड़ाई की जगह समझ की तरफ जा सकती है।
- हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं
पति ने कोई ऐसी बात कह दी जो आपको पसंद नहीं आई, तो हर बार उसी समय जवाब देना जरूरी नहीं है। कुछ बातों को इग्नोर करना भी रिश्ते में शांति बनाए रखने का हिस्सा है।
- सामने वाले की बात भी सुनें
कई बार हम अपनी बात आगे रखने के चक्कर में सामने वाले की बात सुनना ही बंद कर देते हैं। इससे दोनों को लगता है कि उनकी बात समझी नहीं जा रही। पति कुछ कह रहे हों तो बीच में रोकने के बजाय पहले उनकी बात पूरी सुनें। उसके बाद अपनी बात रखें।
- हर बात में जीतने की कोशिश ना करें
रिश्ते में हर बहस का मतलब यह नहीं कि किसी एक को जीतना ही है। अगर दोनों सिर्फ यह साबित करने में लगे रहें कि कौन सही है, तो असली समस्या पीछे रह जाती है।
- सही समय पर जरूरी बात करें
जब पति काम के तनाव में हों, बहुत थके हों या पहले से परेशान हों, तब कोई गंभीर मुद्दा उठाने से बात बिगड़ सकती है। जरूरी बात के लिए ऐसा समय चुनें जब दोनों आराम से बैठकर बात कर सकें। इससे बातचीत के दौरान धैर्य बनाए रखना आसान होता है।
अपनी बात दबाते भी ना रहें!
झगड़े से बचने का मतलब यह नहीं है कि हर बार अपनी बात को दबा दें। अगर किसी बात से आपको परेशानी है, तो उसे साफ और शांत तरीके से कहना जरूरी है। रिश्ते में समझ दोनों तरफ से होनी चाहिए। आपकी भावनाएं और जरूरतें भी उतनी ही जरूरी हैं जितनी आपके पति की।
बार-बार वही समस्या हो तो मिलकर हल निकालें!
अगर एक ही मुद्दे पर बार-बार बहस होती है, तो हर बार उसी तरह बात करने के बजाय दोनों मिलकर इसका हल तय करें। जैसे घर के काम, पैसे, परिवार या समय को लेकर परेशानी है तो साफ-साफ तय करें कि किस तरह इसे संभालना है। अगर बातचीत के बावजूद रिश्ता स्ट्रेसफुल बना हुआ है, तो किसी रिलेशनशिप एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर हो सकता है।
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