Rakesh Jhunjhunwalas Strategy : रमेश दमानी ने कहा कि झुनझुनवाला मानते थे कि बाजार में उतार-चढ़ाव तो अस्थायी हैं, लेकिन भारत की दीर्घकालिक प्रगति एक स्थायी सच्चाई है. इसी सोच ने उनकी निवेश रणनीति का दशकों तक मार्गदर्शन किया है.
रमेश झुनझुनवाला को बिग बुल के नाम स जाना जाता है.
दमानी ने कहा कि जब बाजार में बड़ी गिरावट आती और चारों तरफ निराशा का माहौल होता था, तब झुनझुनवाला एक ही बात दोहराते थे, “भारत की विकास यात्रा पर भरोसा रखो और नकारात्मकता से दूर रहो.” दमानी ने कहा कि झुनझुनवाला मानते थे कि बाजार में उतार-चढ़ाव तो अस्थायी हैं, लेकिन भारत की दीर्घकालिक प्रगति एक स्थायी सच्चाई है. इसी सोच ने उनकी निवेश रणनीति का दशकों तक मार्गदर्शन किया है.
पेड़ कभी आसमान तक नहीं जाता
सफल निवेश के पीछे के मनोविज्ञान को समझाते हुए दमानी ने कहा कि हमें यह समझ लेना चाहिए कि ‘पेड़ कभी आसमान तक नहीं बढ़ते.’ इसका अर्थ यह है कि बाजार हमेशा ऊपर नहीं जा सकता. गिरावट उसका स्वभाव है. असली संपत्ति वह नहीं जो रातों-रात बने, बल्कि वह है जो कंपाउंडिंग के जादू से धीरे-धीरे तैयार हो. निवेश का असली उद्देश्य कुछ ही वर्षों में पूंजी को दोगुना करना और समय के साथ उसे कई गुना बढ़ाना है.
दमानी ने कहा कि बाजार के शुरुआती झटके ही एक निवेशक के चरित्र का निर्माण करते हैं. उन्होंने कहा कि जब 1987 में ‘स्टॉक मार्केट क्रैश’ आया तो उनकी उम्र महज 28 साल थी. उस समय डॉव जोन्स महज एक सत्र में 20% गिर गया था. दमानी ने कहा कि पैसा खोना कभी अच्छा नहीं लगता. बाजार चाहे 10% गिरे या 60%, दर्द बराबर होता है. लेकिन सफल वो ही होता है जो बाजार की वोलैटिलिटी को दुश्मन नहीं, बल्कि निवेश का हिस्सा मानता है.
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