वीकली आधार पर देखें तो सेंसेक्स में इस हफ्ते लगभग 4,000 अंकों की गिरावट हुई, जबकि निफ्टी-50 में कुल 1300 अंकों की गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स करीब 5 प्रतिशत और निफ्टी लगभग 5.31 प्रतिशत गिर चुका है. यह दिसंबर 2024 के बाद बाजार की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है. इस गिरावट के चलते हफ्ते भर में निवेशकों को 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा है.
आज बाजार में गिरावट के बीच कुछ चुनिंदा शेयरों में तेजी भी देखने को मिली, जबकि कई बड़े स्टॉक्स में भारी गिरावट रही.
टॉप गेनर्स (Top Gainers):
- टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में लगभग 2.44% की बढ़त दर्ज की गई.
- HUL करीब 1.08% चढ़ा.
- भारती एयरटेल में हल्की तेजी के साथ करीब 0.12% की बढ़त रही.
टॉप लूजर्स (Top Losers):
- लार्सन एंड टुब्रो (L&T) में सबसे ज्यादा गिरावट, करीब 7.54%.
- हिंडाल्को करीब 6.16% टूटा.
- टाटा स्टील में लगभग 5.15% की गिरावट.
- JSW स्टील करीब 4.55% नीचे रहा.
- अल्ट्राटेक सीमेंट भी करीब 4.27% गिरा.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
बाजार में सबसे अधिक दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से आया. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा दो तेल टैंकरों पर हमले की खबरों ने वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई.
भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, उसके लिए महंगा तेल कई आर्थिक चुनौतियां पैदा करता है. इससे आयात बिल बढ़ता है, परिणामस्वरूप चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और महंगाई भी बढ़ सकती है. इन सभी कारकों का असर कंपनियों की कमाई और निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है.
वैश्विक बाजारों से भी नहीं मिला सहारा
दुनिया भर के बाजार भी इस समय दबाव में हैं. एशियाई बाजारों में कोस्पी इंडेक्स (KOSPI Index), निक्केई 225 (Nikkei 225), एसएसई कंपोजिट इंडेक्स (SSE Composite Index) और हैंग सेंग इंडेक्स (Hang Seng Index) में गिरावट देखी गई.
अमेरिकी बाजारों में भी तेज बिकवाली हुई. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट सभी गिरावट के साथ बंद हुए. डॉव जोन्स 700 से ज्यादा अंक टूटकर इस साल पहली बार 47,000 के नीचे बंद हुआ.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव से अनिश्चितता बढ़ी हुई है. जब तक स्थिति साफ नहीं होती, वैश्विक बाजारों में कमजोरी बनी रह सकती है.
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
भारतीय बाजार पर एक और बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का है. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को ही करीब 7,049 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी निकाल चुके हैं. इस वजह से बड़े और मजबूत माने जाने वाले ब्लू-चिप शेयर भी दबाव में आ गए हैं.
रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया
शुक्रवार को भारतीय रुपया भी कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.37 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया. फॉरेक्स विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मजबूत डॉलर इसके पीछे मुख्य कारण हैं. कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है, जिससे खासकर तेल जैसे उत्पादों की कीमतें और बढ़ सकती हैं.
बैंक और ऑटो शेयरों में भारी दबाव
बाजार में गिरावट के दौरान बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में खास तौर पर दबाव देखा गया. निफ्टी बैंक इंडेक्स करीब 1.75 प्रतिशत गिरकर 54,000 के आसपास आ गया. इसमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक के शेयरों में 2 से 3 प्रतिशत तक गिरावट रही. निजी बैंकों में इंडसइंड बैंक सबसे ज्यादा दबाव में रहा.
ऑटो सेक्टर भी लगातार दूसरे दिन गिरावट में रहा. निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, संभावित गैस संकट और सप्लाई चेन में व्यवधान की आशंकाओं ने इस सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है.
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