अंकित ने 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में सफलता हासिल कर डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) का पद प्राप्त किया है। हालांकि यहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था।
दिन में पढ़ाते थे, रात में BPSC की तैयारी
अंकित कुमार की BPSC की तैयारी किसी बड़े शहर के नामी कोचिंग संस्थान में नहीं हुई। उन्होंने अपने गांव में ही एक साधारण कोचिंग सेंटर बनाया था। यही जगह उनकी पढ़ाई और दूसरे बच्चों को पढ़ाने का केंद्र बनी। करीब 10 सालों तक उन्होंने इसी कोचिंग सेंटर में छात्रों को पढ़ाया और साथ-साथ खुद भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते रहे। एक वीडियो में अंकित ने अपने संघर्ष के बारे में बताते हुए कहते है कि आप देख सकते हैं कि यह मेरा कोचिंग संस्थान है, जिसे मैंने दाची और पलानी से बनाया है। मैं यहीं रहता था और करीब 10 साल तक बच्चों को पढ़ाता रहा। बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ मैं खुद भी परीक्षा की तैयारी करता था।”
BPSC की तैयारी के दौरान उनके सामने लगातार नई चुनौतियां आती रहीं। अंकित ने इन मुश्किलों को अपनी कमजोरी बनने देने के बजाय उनसे सीख ली। उन्होंने कहा, “हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था और हर चुनौती के साथ मैंने खुद को और मजबूत बनाया।”
पैसे की कमी बनी पहली बड़ी चुनौती
अंकित कुमार के सफर में आर्थिक तंगी सबसे बड़ी शुरुआती चुनौतियों में से एक थी। उन्होंने बताया कि उनके पिता बेहद गरीब परिवार से आते हैं और बड़े शहरों के महंगे कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई का खर्च उठाना परिवार के लिए संभव नहीं था।
सेल्फ-स्टडी को बनाया तैयारी का आधार
आर्थिक स्थिति के कारण अंकित के पास बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा लेने का विकल्प नहीं था। ऐसे में उन्होंने सेल्फ-स्टडी को अपनी तैयारी का आधार बनाया। उन्होंने BPSC परीक्षा के पैटर्न को करीब से समझा और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों (PYQ) का अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने अपनी जरूरत और समझ के हिसाब से घर पर ही तैयारी की रणनीति तैयार की। बिना किसी बड़े संस्थागत सहयोग के उन्होंने नियमित अध्ययन जारी रखा और परीक्षा की तैयारी को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद खुद पर भरोसा रखते हुए की गई यह तैयारी आगे चलकर उनकी सफलता की मजबूत नींव बनी।
गांव के छात्रों के लिए अंकित का खास संदेश
अंकित कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें उन्होंने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए उन छात्रों के लिए भी खास संदेश दिया, जो सीमित संसाधनों के बीच गांवों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों से खुद पर भरोसा रखने और मेहनत के साथ धैर्य बनाए रखने की अपील की।
अंकित का संदेश खास तौर पर उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो बड़े शहरों के महंगे कोचिंग संस्थानों या सीमित संसाधनों के कारण खुद को प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ से पीछे समझते हैं। उनका कहना है कि सही रणनीति, मेहनत, धैर्य और PYQ के बेहतर विश्लेषण के जरिए गांव में रहकर भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है।
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