मोदी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के साथ मुलाकात के दौरान ग्लास्गो के एक रेस्तरां में भारत के गलत नक्शे पर आपत्ति जताने पर मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन की सराहना की।
असम की मुक्केबाज ने हंसते हुए जवाब दिया, ”हमने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और यह खेलों का आखिरी दिन था। यह खुशी का अवसर था। हम जश्न मना रहे थे और मुझे देश का गलत नक्शा देखना अच्छा नहीं लगा। मैंने विनम्रतापूर्वक उन्हें बताया और उन्होंने बदलाव भी कर दिया।”
मोदी ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि यह समझदारी भरा काम था, खासकर ऐसे समय में जब वह अपनी जीत का जश्न मना रही थीं।
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में इस बार 39 पदक जीते जिनमें 13 गोल्ड पदक शामिल हैं। भारत ने सात गोल्ड मेडल बॉक्सिंग में जीते।
मोदी ने टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता से कहा, ”खेलों के समापन और जश्न के माहौल में उस नक्शे के महत्व को पहचान पाना। मैं आपको सच बता सकता हूं, वह वीडियो साधारण नहीं था। लोग उसे लंबे समय तक याद रखेंगे।”
ग्लास्गो में 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलोग्राम का रिकॉर्ड भार उठाकर गोल्ड मेडल जीतने वाली वेटलिफ्टर मीराबाई चानू से प्रधानमंत्री ने बातचीत में पोडियम पर उनके भावुक होने के बारे में पूछा। बातचीत के दौरान उन्होंने मीराबाई को लड्डू भी खिलाया।
मीराबाई ने कहा कि यह उन भावनाओं को बाहर निकालने का पल था जिन्हें वह पिछले चार वर्षों से अपने अंदर दबाए हुए थीं।
मोदी ने कहा, ”इतने आंसू टपक रहे थे।”
भावुक लेकिन मुस्कुराती हुई मीराबाई ने जवाब दिया, ”मैं उस क्षण बहुत खुश और भावुक थी। मैं इसलिए रो रही थी क्योंकि पेरिस ओलंपिक में मैं एक किलोग्राम से पदक से चूक गई थी। पिछले चार सालों में मैंने बहुत कुछ झेला है। मैं चोटों और कुछ पारिवारिक समस्याओं से भी जूझ रही थी।”
उन्होंने अपनी चोटोंं और पारिवारिक समस्याओं के बारे में विस्तार से बताए बिना कहा, ”कई सारी बातें थीं। ये चार साल मेरे लिए बहुत कठिन रहे। इसलिए जब मैं पोडियम पर खड़ी हुई और हमारा ध्वज फहराया गया और राष्ट्रगान बजा, तो मैं आंसू नहीं रोक पाई।”
पुरुषों के 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज नरेन्द्र बेरवाल ने 2015 के वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में एक पाकिस्तानी मुक्केबाज को हराने के बाद उससे मिली एक मजेदार प्रतिक्रिया के बारे में मोदी को बताया।
उन्होंने कहा, ”वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स 2015 के दौरान मेरा पाकिस्तान के एक मुक्केबाज से मुकाबला था। मैंने उसमें जीत हासिल की लेकिन इसके बाद जब उपचार के लिए हम दोनों मेडिकल रूम में थे तो उसने मुझसे कहा, ‘भाईजान, आपका नाम नरेन्द्र है, आपके कोच का नाम नरेन्द्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेन्द्र है। मुझे नरेन्द्र नाम से नफरत हो गई है।”
इस पर मोदी हंस पड़े।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के प्रयासों की सराहना की और उन्हें प्रेरणास्रोत बताया।
मोदी ने कहा, ”मैं पिछले 12-13 वर्षों से इस घर में हूं और अगर कोई एक ऐसा वर्ग है जिससे मैं यहां नियमित रूप से मिला हूं, तो वह खिलाड़ी हैं। क्योंकि आप भारत के लिए पदक जीतने की कोशिश करते हैं और नई ऊंचाइयां छूने की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।”
उन्होंने कहा, ”स्कूलों में खेलों को बढ़ावा देने के हमारे प्रयासों से कहीं अधिक आपके पदक लोगों को प्रेरित करते हैं।”
मोदी ने मुक्केबाज जादुमणि सिंह (55 किलोग्राम) की भी तारीफ की, जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान 26 जुलाई को पाकिस्तान के मुक्केबाज को हराया था। 26 जुलाई को 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की विजय की याद में विजय दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
मोदी ने भारतीय सेना में सेवारत जादुमणि से कहा, ”भारतीय सशस्त्र बलों को अपना पदक समर्पित करके आपने पहले से ही गौरवशाली क्षण में और गौरव जोड़ दिया है। आपने उसे हराया जिसे हारना चाहिए था।”
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