छुट्टियों वाले कारोबारी सप्ताह के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार का समापन किया हैं। सप्ताह के दौरान निवेशकों का भरोसा बेहतर हुआ और इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। इसी वजह से निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी की, जिससे प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 297.57 अंकों यानी 0.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 77,100 के स्तर पर बंद हुआ हैं। वहीं निफ्टी 50 सूचकांक 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर को फिर से पार करते हुए 24,056 पर पहुंच गया हैं। हालांकि व्यापक बाजार में उतनी मजबूती नहीं दिखी। निफ्टी मिडकैप 150 में लगभग 0.9 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 250 लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ।
बता दें कि इस सप्ताह सभी क्षेत्रों में एक जैसी तेजी देखने को नहीं मिली। दवा, पर्यटन और निजी बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी रही। दवा क्षेत्र का सूचकांक करीब 2.8 प्रतिशत, पर्यटन क्षेत्र 2.7 प्रतिशत और निजी बैंक सूचकांक लगभग 1 प्रतिशत मजबूत हुआ हैं। दूसरी ओर धातु, सूचना प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा है।
गौरतलब है कि सबसे ज्यादा कमजोरी धातु क्षेत्र में देखने को मिली। निफ्टी मेटल सूचकांक लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ और सप्ताह भर में लगभग 5 प्रतिशत टूट गया हैं। हालांकि वर्ष 2026 की शुरुआत से जून तक यह सूचकांक 20 प्रतिशत से अधिक चढ़ चुका था। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्त ब्याज दर नीति की आशंका और मुनाफावसूली के कारण धातु कंपनियों के शेयरों में दबाव बढ़ा हैं। इस दौरान वेदांता, नेशनल एल्युमिनियम और हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में सबसे अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई हैं। ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 73.6 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई लगभग 71.4 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया हैं। कच्चे तेल के सस्ता होने से महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई हैं और तेल आयात करने वाले देशों, खासकर भारत के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर अब भी बाजार की नजर बनी हुई हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने जून महीने में भारतीय शेयर बाजार से लगभग 45,000 करोड़ रुपये की निकासी की हैं। यह लगातार चौथा महीना है जब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की हैं। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 76,000 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को सहारा दिया।
अब नए कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण घटनाओं पर रहेगी। अमेरिका के रोजगार संबंधी आंकड़े, भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के सूचकांक, जून महीने के वाहन बिक्री आंकड़े और कच्चे तेल की कीमतों की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार फिलहाल निफ्टी 50 के लिए 24,200 का स्तर प्रमुख बाधा बना हुआ हैं। यदि यह स्तर मजबूती से पार होता है तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती हैं। वहीं 23,650 का स्तर निकटतम सहारा माना जा रहा हैं। इसके नीचे फिसलने पर बाजार में फिर से मुनाफावसूली बढ़ सकती हैं।
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