सावन के महीने में महिलाएं इकट्ठा होकर झूला झूलती हैं और कुछ बेहद सुंदर-अच्छे गीतों को गीतों को गाती हैं। सावन का एक फेमस गीत ‘झूला तो पड़ गए’ के बोल यहां देखें।
झूला तो पड़ गएं, अम्बुआ की डार पे जी,
एजी कोई राधा को, गोपाला बिन राधा को, झुलावे झूला कौन ,
झूला तो पड़ गएं, अम्बुआ की डार पे जी,
धीरज धर ले, मन समझाए ले री,
एजी अगले सावन में,
राधाजी अगले सावन झूलेंगे कान्हां संग,
धीरज धर ले, मन समझाए ले री,
या राधा का जीवन श्याम बिना,
रामायण जैसे राम बिना,
संग की सहेलियां
समझें ना बात को जी
संग की सहेलियां,
समझें ना बात को जी,
एजी कोई उन बिन, हम्बे उन बिन,
कछु ना सुहाए,
झूला तो पड़ गएं , अम्बुआ की डार पे जी,
झूला तो पड़ गएं , अम्बुआ की डार पे जी,
इन बागन में , इन फूलन में,
हम झूले प्रीत की झूलन में,
अब ये फुलवा,
चुभ रहे शूल से जी,
एजी इन बागन में,
अकेले इन बागन में , पड़े ना अब पांव,
झूला तो पड़ गएं , अम्बुआ की डार पे जी,
मन भावन ये रुत, सावन की,
कछु साजन की, कछु बावन की,
बैरी पप्पियां, पिऊ पिऊ रट रहो जी,
बैरी पप्पियां, पिऊ पिऊ रट रहो जी,
एजी वोतो जाने ना , पप्पिया बैरी जाने ना,
बिरहणी का हाल,
झूला तो पड़ गएं , अम्बुआ की डार पे जी,
सावन में पपीहे के जैसे,
बिरहा के दिन बीते ऐसे,
बंशी बजे ना , अब सखी चैन की जी,
बंशी बजे ना, अब सखी चैन की जी,
एजी मेरा मनवा, बहना मेरा मनवा
हुआ बेचैन,
झूला तो पड़ गएं , अम्बुआ की डार पे जी
नोट- ये गीत सभी लोग अलग-अलग तरीकों से गाते हैं। आप अपने लिरिक्स के साथ इसे सावन का झूला झूलते हुए गा सकते हैं।
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