विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को भारत के उम्मीदवार प्रोफ़ेसर बिमल एन. पटेल को न्यूयॉर्क में ‘इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ द सी’ (ITLOS) का जज चुने जाने पर बधाई दी। वे 2026-2035 के कार्यकाल के लिए इस पद पर काम करेंगे।
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एक्स पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री ने ‘यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ द सी’ (UNCLOS) के सदस्य देशों का उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। जयशंकर ने लिखा कि बधाई हो डॉ. बिमल पटेल! समर्थन के लिए UNCLOS के सदस्य देशों का तहे दिल से शुक्रिया। पटेल इस साल 1 अक्टूबर को ट्रिब्यूनल में अपना पद संभालेंगे। यह ट्रिब्यूनल एक खास ग्लोबल कोर्ट के तौर पर काम करता है, जो दुनिया के महासागरों, उनके इस्तेमाल और संसाधनों के शांतिपूर्ण और कानूनी नियमन को सुनिश्चित करता है। इससे पहले, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पटेल के चुनाव को एक अहम पड़ाव बताया था। उन्होंने कहा कि हम भारत पर भरोसा जताने के लिए सभी सदस्य देशों का शुक्रिया अदा करते हैं और प्रो. पटेल तथा ट्रिब्यूनल के लिए चुने गए सभी प्रतिष्ठित सदस्यों को बधाई देते हैं।
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पटेल के सफल चुनाव से ट्रिब्यूनल में भारत का प्रतिनिधित्व बना रहेगा। यह चुनाव 15 से 19 जून तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में UNCLOS के ‘स्टेट्स पार्टीज़’ (सदस्य देशों) के 36वें सम्मेलन के तहत हुआ। न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी मिशन ने कहा कि आज न्यूयॉर्क में ‘इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ द सी’ (ITLOS) के जज के तौर पर चुने जाने पर प्रोफ़ेसर डॉ. बिमल एन. पटेल को बधाई। उनके चुने जाने से मल्टीलेटरलिज़्म (बहुपक्षवाद) और ‘लॉ ऑफ़ द सी’ (समुद्री कानून) के प्रति भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता आगे बढ़ती है। पटेल को बधाई देते हुए, मिशन ने सभी सदस्य देशों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और UNCLOS के प्रति सभी उम्मीदवारों के विज़न और प्रतिबद्धता की सराहना की। यह 1994 में लागू हुआ था और वर्तमान में इसके 172 सदस्य हैं। ‘इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ द सी’ (ITLOS) एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था है, जिसे 1982 के ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन’ (United Nations Convention on the Law of the Sea) के तहत स्थापित किया गया था।
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