रूस ने टेलीग्राम के फाउंडर पावेल डुरोव पर आतंकवाद में मदद करने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय वॉन्टेड नोटिस जारी किया। अगर उन पर लगे आरोप साबित हो जाते हैं, तो उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
हिंसा में कई लोगों की जान गई
एजेंसी ने कहा कि इस गतिविधि के कारण ‘बड़ी संख्या में लोगों की जान गई’ और टेलीग्राम पर रूसी हितों के खिलाफ ऑपरेशन में मदद करने का आरोप लगाया। FSB ने यूक्रेनी सुरक्षा एजेंसियों पर यह आरोप भी लगाया कि वे टेलीग्राम पर एक लोकप्रिय डेटिंग चैटबॉट का इस्तेमाल करके रूसी नागरिकों को कथित तोड़-फोड़ और आतंकवादी गतिविधियों के लिए फुसलाती और भर्ती करती हैं। एजेंसी के अनुसार, जुलाई 2025 से पूरे रूस में चैटबॉट के 46 यूजर्स को हिरासत में लिया गया है, जिनकी उम्र 12 से 22 वर्ष के बीच है।
आरोप साबित हुए तो हो सकती है उम्रकैद
FSB के ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब रूस में टेलीग्राम पर दबाव बढ़ रहा है। वहां अधिकारी बार-बार इस प्लेटफॉर्म तक पहुंच को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार द्वारा समर्थित विकल्पों को बढ़ावा दे रहे हैं। डुरोव ने पहले भी रूसी अधिकारियों पर मनगढ़ंत बहाने बनाकर टेलीग्राम पर पाबंदी लगाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की गई है और आरोप लगाया था कि इन पाबंदियों का मकसद ‘निजता और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार’ को दबाना है। अगर रूस में उन पर लगे आरोप साबित हो जाते हैं, तो डुरोव को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
रूस ने इंटरनेट पर अपना कंट्रोल और सख्त किया
डुरोव के खिलाफ की गई कार्रवाई, ऑनलाइन कम्युनिकेशन पर सरकारी कंट्रोल बढ़ाने की रूस की लंबे समय से चल रही कोशिशों का ही एक हिस्सा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दौर में, रूसी अधिकारियों ने कई कड़े कानून लागू किए हैं, सरकारी नियमों को न मानने वाली वेबसाइटों और प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया है, और इंटरनेट ट्रैफिक पर नजर रखने और उसे कंट्रोल करने की अपनी क्षमता बढ़ाई है। रूस में फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे कई बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिया गया है, जबकि यूट्यूब की स्पीड कम कर दी गई है। सिग्नल और वाइबर जैसी मैसेजिंग सर्विस को भी ब्लॉक कर दिया गया है, और टेलीग्राम व वॉट्सऐप के इस्तेमाल पर भी लगातार पाबंदियां बढ़ाई जा रही हैं। हालांकि यूजर्स अभी भी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) के जरिए कुछ पाबंदियों से बच सकते हैं, लेकिन रूसी अधिकारी अक्सर VPN सर्विस को भी ब्लॉक कर देते हैं।
साथ ही, मॉस्को ने MAX को बढ़ावा दिया है, जो रूस सरकार के समर्थन वाला एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है और जिसे अधिकारी विदेशी सर्विस के घरेलू विकल्प के तौर पर पेश करते हैं। इस प्लेटफॉर्म में मैसेजिंग के साथ-साथ ऑनलाइन सरकारी सर्विस, पेमेंट और दूसरे फंक्शन भी शामिल हैं। आलोचकों ने MAX से जुड़े प्राइवेसी और निगरानी के जोखिमों पर चिंता जताई है। प्लेटफॉर्म का कहना है कि वह अनुरोध किए जाने पर अधिकारियों के साथ यूजर का डेटा शेयर कर सकता है, जबकि जानकारों ने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन न होने पर भी चिंता जताई है।
कौन हैं पावेल डुरोव?
डुरोव का जन्म रूस में हुआ था और विदेश जाने से पहले उन्होंने अपना करियर वहीं शुरू किया था। उन्होंने 2013 में टेलीग्राम की शुरुआत की थी और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का कहना है कि अब दुनियाभर में इसके 1 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं। इससे पहले उन्होंने रूस के फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म, VKontakte की शुरुआत की थी। रूसी अधिकारियों के बढ़ते दबाव के बीच, डुरोव ने 2014 में इस सोशल नेटवर्किंग कंपनी में अपनी बची हुई हिस्सेदारी बेच दी थी। डुरोव के पास अब संयुक्त अरब अमीरात और फ्रांस के पासपोर्ट हैं और उन्होंने अपना ज्यादातर समय रूस के बाहर बिताया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दोनों पक्षों के लिए टेलीग्राम एक अहम कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म बन गया है, जिससे चल रहे संघर्ष में यह काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
टेलीग्राम को लेकर डुरोव के सामने आया यह रूसी मामला कोई पहली बड़ी कानूनी चुनौती नहीं है। 2024 में, फ्रांसीसी अधिकारियों ने पेरिस में डुरोव को गिरफ्तार किया। उन पर टेलीग्राम के जरिए आपराधिक गतिविधियों (जैसे ड्रग तस्करी और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का वितरण) में शामिल होने के आरोप थे। फ्रांसीसी अधिकारियों ने इन आरोपों की भी जांच की है कि टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर आपराधिक गतिविधियों से ठीक से निपटने में नाकाम रहा और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अनुरोधों पर पर्याप्त सहयोग नहीं किया।
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