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रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयर में आज कारोबार के दौरान 2% से ज्यादा की तेजी है। कंपनी का शेयर ₹1,345 के स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार को हुई 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के बाद कई बड़े ब्रोकरेज हाउसेज ने इसके भविष्य के रोडमैप और जियो इन्फोकॉम के IPO के लिए सेबी (Sebi) के पास दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) को लेकर अपनी एनालिसिस रिपोर्ट जारी की है।
जियो का IPO और वैल्यू अनलॉकिंग
- नोमुरा ब्रोकरेज के मुताबिक, जियो की लिस्टिंग से रिलायंस के भीतर डिजिटल बिजनेस की वैल्यू अनलॉक होगी।
- यह उन नए निवेशकों के लिए एक बेहतरीन एंट्री पॉइंट साबित होगा जो सिर्फ टेलीकॉम बिजनेस में निवेश करना चाहते हैं।
- नोमुरा ने रिलायंस के शेयर पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹1,640 तय किया है।
रिलायंस इंटेलिजेंस: एआई हब का प्लान
नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ‘रिलायंस इंटेलिजेंस’ अब प्लानिंग के फेज से निकलकर एग्जीक्यूशन के फेज में आ चुका है। जामनगर में बन रहे सोवरेन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब में वित्त वर्ष 2026 के अंत तक पहले 120 मेगावाट (MW) क्षमता को टारगेट किया जा रहा है। यह रिलायंस के लिए शुरुआती फेज का एक बड़ा कैपेक्स निवेश है।
ऑयल-टू-केमिकल्स और दहेज-नागोथने प्रोजेक्ट्स
एमके ग्लोबल के अनुसार, ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट में ग्रोथ का अगला फेज हाई-वैल्यू केमिकल्स और मैटेरियल्स में निवेश से आएगा। दहेज में 3 mmtpa क्षमता का PTA प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे पॉलिएस्टर वैल्यू चेन में रिलायंस की स्थिति मजबूत होगी।
वहीं नागोथने में 1.2 mmtpa क्षमता का PVC प्रोजेक्ट भारत की आयात पर निर्भरता को कम करेगा और इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन व कंज्यूमर सेगमेंट की घरेलू मांग को पूरा करेगा। एमके ग्लोबल ने शेयर पर ₹1,680 के टारगेट प्राइस के साथ बाय रेटिंग दी है।
5 साल में EBITDA दोगुना करने का लक्ष्य
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने कहा कि कंपनी ने अगले 5 सालों में अपने कंसोलिडेटेड अर्निंग बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन एंड अमॉर्टाइजेशन (Ebitda) को दोगुना से अधिक करने का लक्ष्य रखा है।
इसका मतलब है कि वित्त वर्ष 2031 तक यह EBITDA ₹4.2-4.5 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। ऐसा होने पर रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड (ROCE) दोगुना हो सकता है, जिससे शेयर की री-रेटिंग होगी।
न्यू एनर्जी और जियो का ट्रिगर
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि जियो के IPO के बाद इस साल 10 GW इंटीग्रेटेड सोलर प्रोजेक्ट और 40 GW बैटरी प्लांट के चालू होने से बाजार में रिलायंस की री-रेटिंग लगातार जारी रहेगी।
इसके बाद कच्छ में सोलर + बैटरी और हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स भी शुरू होंगे। ब्रोकरेज ने ₹1,670 के टारगेट के साथ बाय रेटिंग दोहराई है।
डिजिटल सेगमेंट रहेगा ग्रोथ ड्राइवर
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, रिलायंस जियो कंपनी का सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बना रहेगा और डिजिटल सेगमेंट रिलायंस के कुल इंक्रीमेंटल EBITDA में लगभग 80% का योगदान देगा।
वित्त वर्ष 2026-28 के बीच वायरलेस टैरिफ हाइक (वित्त वर्ष-2027 की दूसरी तिमाही में 15% बढ़ोतरी), वायरलेस मार्केट शेयर में बढ़त और होम्स व एंटरप्राइज सेगमेंट के विस्तार से 18% का EBITDA CAGR देखने को मिल सकता है।
कैपेक्स में कमी और फ्री कैश फ्लो
- मोतीलाल ओसवाल ने अनुमान लगाया है कि रिलायंस का कंसोलिडेटेड EBITDA और PAT वित्त वर्ष 2026-28 के दौरान 9-10% CAGR से बढ़ेगा।
- डिजिटल सर्विसेज में कैपेक्स का पीक फेज अब खत्म हो चुका है, इसलिए वित्त वर्ष 2026-28 के लिए सालाना कंसोलिडेटेड कैपेक्स ₹1.25 ट्रिलियन रहने का अनुमान है।
- इससे लगभग ₹1 ट्रिलियन का मजबूत फ्री कैश फ्लो (FCF) जनरेट होगा और कंसोलिडेटेड नेट डेट (कर्ज) में कमी आएगी। ब्रोकरेज ने ₹1,655 का टारगेट प्राइस दिया है।
नुवामा का आउटलुक और रिस्क फैक्टर्स
नुवामा के अनुसार, न्यू एनर्जी बिजनेस से वित्त वर्ष 2027 से वित्तीय प्रदर्शन में बड़ा योगदान मिलना शुरू हो जाएगा। चालू हो चुके सोलर मॉड्यूल/सेल प्लांट्स की क्षमता बढ़ाकर 20GW की जा रही है, जिससे वित्त वर्ष 2026 के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 5% की बढ़त हो सकती है।
रिलायंस इंटेलिजेंस (RI) और रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (RCPL) कंपनी के नए ग्रोथ इंजन होंगे। नुवामा ने ₹1,765 का टारगेट प्राइस दिया है, लेकिन साथ ही आगाह किया है कि ग्लोबल डिमांड में सुस्ती या क्षमता में बढ़ोतरी से रिफाइनिंग और केमिकल मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
क्या होता है DRHP?
ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस एक शुरुआती आधिकारिक दस्तावेज होता है जिसे कोई भी कंपनी अपना IPO लाने से पहले मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के पास जमा करती है। इसमें कंपनी के बिजनेस, वित्तीय स्थिति और रिस्क फैक्टर्स की पूरी डिटेल होती है।
EBITDA और CAGR का मतलब क्या है?
EBITDA का मतलब अर्निंग बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन एंड अमॉर्टाइजेशन होता है, जो कंपनी की कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी को दर्शाता है। CAGR (कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) का इस्तेमाल एक तय अवधि में सालाना औसतन निवेश या कमाई की ग्रोथ नापने के लिए किया जाता है।
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रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना बैठक, यानी AGM शुक्रवार, 19 जून को हुई। कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने करीब 44 लाख शेयरहोल्डर्स को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कंपनी यूरोप और अफ्रीका के मार्केट में एंट्री कर रही है। वहीं, कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO भी लाने जा रही है।
अंबानी बताया कि IPO के लिए 19 जून को ही सेबी के पास ड्राफ्ट दस्तावेज (DRHP) जमा कर दिए गए हैं। कंपनी 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और IPO के जरिए करीब 4 बिलियन डॉलर यानी ₹37,700 करोड़ जुटाने की योजना है। पूरी खबर पढ़ें…
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