जब पहाड़ों की ढलानों पर हल्की गर्माहट शुरू होती है, तब ग्रामीण इसे खेतों और जंगलों से खोदकर निकालते हैं. ताजी मिट्टी की खुशबू और साधारण मसालों के मेल से जब यह ‘तोड़’ तैयार होता है, तो इसका स्वाद किसी भी शाही पकवान को मात दे सकता है. आइए जानते हैं, सेहत और स्वाद से भरपूर इस पहाड़ी सौगात को बनाने की पारंपरिक विधि.
तरुड़ कंद (तोड़) बनाने की सामग्री
इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए आपको बाजार से कोई विदेशी मसाला लाने की जरूरत नहीं है. घर की रसोई में मौजूद बुनियादी चीजों से ही इसका असली जायका उभर कर आता है…
तरुड़ कंद- 500 ग्राम (ताजा हो तो बेहतर)
पानी- 2 कप
सरसों का तेल- 2 बड़े चम्मच (पहाड़ी स्वाद के लिए सरसों तेल ही चुनें)
सरसों के दाने- 1 छोटा चम्मच
हल्दी पाउडर- ½ छोटा चम्मच
लाल मिर्च पाउडर- ½ छोटा चम्मच
धनिया पाउडर- 1 छोटा चम्मच
जीरा पाउडर- ½ छोटा चम्मच
हरी मिर्च- 1 बारीक कटी हुई
नमक- स्वादानुसा
दही- 2-3 चम्मच (वैकल्पिक)
नींबू का रस- 1 छोटा चम्मच (वैकल्पिक)
बनाने की विधि: स्टेप-बाय-स्टेप
सबसे पहले 500 ग्राम तरुड़ कंद को अच्छे से पानी से धो लें. ताकि उसमें लगी सारी मिट्टी साफ हो जाए. इसके बाद इन्हें प्रेशर कुकर में डालें और 2 कप पानी डालकर मध्यम आंच पर 2-3 सीटी आने तक उबाल लें. जब कंद नरम हो जाएं तो गैस बंद कर दें और इन्हें ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद कंद का छिलका उतार लें और इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें.
अब एक कढ़ाई लें और उसमें 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल डालकर गरम करें. तेल गरम होने पर उसमें 1 छोटा चम्मच सरसों के दाने डालें और उन्हें चटकने दें.इसके बाद ½ छोटा चम्मच हल्दी, ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, ½ छोटा चम्मच जीरा पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर मसालों को हल्का सा भून लें. साथ में 1 बारीक कटी हरी मिर्च भी डाल दें.
जब मसालों से अच्छी खुशबू आने लगे, तब उसमें कटे हुए उबले कंद डाल दें. अब इन्हें हल्के हाथ से चलाते हुए करीब 5 से 7 मिनट तक भूनें, ताकि मसाले कंद में अच्छी तरह मिल जाएं. अगर आप चाहें तो आखिर में 2-3 चम्मच दही या 1 छोटा चम्मच नींबू का रस भी डाल सकते हैं. इससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
गृहणी नर्वदा देवी का कहना है, ‘पहाड़ों में तरुड़ कंद का तोड़ बहुत पसंद किया जाता है. फाल्गुन के महीने में जब ये ताज़ा निकलते हैं, तब हम इसे घर में बनाते हैं. इसे बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता और साधारण मसालों में ही इसका स्वाद बहुत अच्छा बन जाता है. पहले के समय में लोग इसे खेतों से खुद खोदकर लाते थे और ताज़ा बनाकर खाते थे.’ इस तरह तरुड़ कंद से बना यह पारंपरिक तोड़ स्वाद में बेहद लाजवाब होता है. पहाड़ों में लोग इसे गरमागरम रोटी या दाल-चावल के साथ बड़े चाव से खाते हैं.
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