आर माधवन ने हाल ही में सुगाता मित्रा के 1999 के ‘होल इन द वॉल’ एक्सपेरिमेंट का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें दिखाया गया है कि बच्चे सबसे अच्छा तब सीखते हैं जब माता-पिता चम्मच से खिलाना बंद कर देते हैं और बस उनकी नैचुरल जिज्ञासा को बढ़ावा देते हैं।
क्या था ‘होल इन द वॉल’ का वो मशहूर तजुर्बा?
सुगता मित्रा ने दिल्ली की एक झुग्गी-बस्ती में ईंट की दीवार के अंदर एक कंप्यूटर फिट कर दिया। यह कोई आम कंप्यूटर नहीं था, बल्कि इसमें हाई-स्पीड इंटरनेट भी लगा हुआ था। उन्होंने बस उस कंप्यूटर को वहां छोड़ दिया और बच्चों को उसे अपने तरीके से इस्तेमाल करने की पूरी आजादी दी। कमाल की बात तो यह थी कि उन गरीब बच्चों को अंग्रेजी का एक अक्षर भी नहीं आता था। लेकिन, कुछ ही हफ्तों के भीतर एक चमत्कार हुआ। बच्चों ने खुद ही कंप्यूटर चलाना सीख लिया। उन्होंने फाइलें डाउनलोड करना और गेम्स खेलना भी शुरू कर दिया। बिना किसी टीचर के, बिना किसी की मदद के।
जीनेटिक्स और डीएनए जैसी मुश्किल पढ़ाई
मित्रा यहीं नहीं रुके। वह देखना चाहते थे कि क्या यह तरीका किसी बहुत ही मुश्किल विषय पर भी काम कर सकता है। क्या बच्चे बिना पढ़ाए कुछ भारी-भरकम चीजें भी सीख सकते हैं? वीडियो के मुताबिक, मित्रा ने इसी तजुर्बे को भारत के एक दूर-दराज के गांव में दोहराया।
इस बार उन्होंने कंप्यूटरों में बायोटेक्नोलॉजी और डीएनए रेप्लिकेशन से जुड़ी काफी मुश्किल सामग्री डाल दी। यह सब कुछ पूरी तरह से अंग्रेजी में था। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस विषय की कोई भी फॉर्मल पढ़ाई या ट्रेनिंग न होने के बावजूद, बच्चों ने खुद ही जीनेटिक्स के बारे में इतना कुछ सीख लिया कि उन्होंने बिना किसी मदद के टेस्ट में 30% नंबर हासिल कर लिए।
शानदार रहा परफॉर्मेंस
नतीजे चौंकाने वाले थे, लेकिन मित्रा को यकीन था कि अगर बच्चों को सही तरह का सपोर्ट मिले, तो वे और भी बेहतर कर सकते हैं। इसके बाद, मित्रा ने गांव की ही एक ऐसी महिला को बुलाया जिसे जीनेटिक्स के बारे में एबीसीडी भी नहीं पता थी।
उस महिला का काम बच्चों को पढ़ाना नहीं था। उसे उनके सवालों के जवाब भी नहीं देने थे। उसका काम बस बच्चों के पीछे खड़े रहना और एक दादी की तरह उनकी हौसलाअफजाई करना था। नतीजा एकदम हैरान कर देने वाला था। सिर्फ दो महीने के अंदर, बच्चों ने टेस्ट में 50% नंबर स्कोर किए। यह स्कोर उन बच्चों के बिल्कुल बराबर था जिन्हें बकायदा क्लासरूम में एक प्रॉपर टीचर पढ़ा रहा हो।
बच्चों को सब कुछ सिखाने की जरूरत नहीं
माधवन द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो से एक बात शीशे की तरह साफ हो जाती है कि बच्चों को हर एक बात सिखाने या बताने के लिए किसी बड़े इंसान की जरूरत नहीं होती। उन्हें सिर्फ सही टूल्स, बात करने और सोचने के लिए कुछ अच्छे दोस्त, और एक ऐसे बड़े इंसान की जरूरत होती है जो उनके हौसले को टूटने न दे और उन्हें शाबाशी दे।
माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा सबक
आजकल के दौर में माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को हर मुश्किल से बचाने की कोशिश करते हैं। जैसे ही बच्चा किसी सवाल में अटकता है, मां-बाप फौरन उसका जवाब हाजिर कर देते हैं। लेकिन यह वीडियो हमें सिखाता है कि ऐसा करने से हम जाने-अनजाने में बच्चों की अपनी समझ और काबिलियत को मार रहे हैं। जब आपका बच्चा किसी परेशानी में फंसे, तो तुरंत जवाब देने की आदत पर कंट्रोल करें। उन्हें गलतियां करने दें, खुद चीजों को आजमाने दें और अपने जवाब खुद तलाशने का पूरा मौका दें। माधवन की पोस्ट का इशारा बहुत ही साफ है कि बच्चों के पास पैदाइशी उत्सुकता होती है। बस उन्हें सही माहौल और पूरी आजादी दीजिए, फिर देखिए वे आपको कैसे हैरान कर देते हैं। अगली बार जब आपका बच्चा कुछ नया कर रहा हो, तो बस आराम से बैठें, उसकी हिम्मत बढ़ाएं और उसे कुछ कमाल करने दें।
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