कई राज्यों के राज्य कोटे में किया आवेदन
यूनिवर्सिटी के अनुसार, इन 25 अभ्यर्थियों ने पंजाब राज्य कोटा के अलावा चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, असम, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भी राज्य कोटा के तहत एमबीबीएस दाखिले के लिए आवेदन किया था। इनमें 8 अभ्यर्थियों ने चंडीगढ़, 5 ने कर्नाटक, 3-3 ने हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में आवेदन किया था। वहीं, असम, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में एक-एक अभ्यर्थी ने राज्य कोटे के तहत दाखिले के लिए आवेदन किया था।
पंजाब सरकार की अधिसूचना के तहत हुई कार्रवाई
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह कार्रवाई पंजाब सरकार की 10 जुलाई 2026 की अधिसूचना के क्लॉज-18 के तहत की है। इस प्रावधान के अनुसार पंजाब राज्य कोटा के तहत एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों को निर्धारित पात्रता और अन्य शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के दौरान इन 25 अभ्यर्थियों को संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करते पाया गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने उन्हें शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 85 प्रतिशत पंजाब राज्य कोटा सीटों की दाखिला प्रक्रिया से बाहर कर दिया।
क्या कहता है नियम
नियमों के मुताबिक, कोई अभ्यर्थी एक से अधिक राज्यों के राज्य कोटे के तहत दाखिले का दावा नहीं कर सकता। यूनिवर्सिटी की जांच में सामने आया कि इन अभ्यर्थियों ने पंजाब के अलावा अन्य राज्यों में भी राज्य कोटा सीटों के लिए आवेदन किया था। अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में राज्य कोटे के लिए आवेदन करने से एक अभ्यर्थी द्वारा एक से अधिक राज्यों में राज्य कोटे का लाभ लेने की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी तरह की स्थिति को रोकने के लिए डॉक्यमेंट्स का वेरिफिकेशन किया गया।
अभ्यर्थी और माता-पिता का हलफनामा जरूरी
बता दें कि पंजाब सरकार ने राज्य कोटा के तहत दाखिले की प्रक्रिया में अभ्यर्थी और उसके माता-पिता से निर्धारित शर्तों के संबंध में हलफनामा लेना अनिवार्य किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अभ्यर्थी नियमों का पालन कर रहा है और एक से अधिक राज्यों के राज्य कोटे का लाभ लेने का दावा नहीं कर रहा है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.