कश्मीर के पुलवामा जिले के रहने वाले मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) फाइटर ओवैस याकूब ने बुल्गारिया में ‘BRAVE CF 107’ प्रतियोगिता में शानदार जीत दर्ज की। विदेशी धरती पर खिताबी जीत के बाद के उस भावुक पल को याद करते हुए ओवैस बताते हैं, ‘जब मैं बुल्गारिया में लड़ रहा था, तब परिवार और दोस्त साथ नहीं थे। वहां मौजूद दर्शक अपने पसंदीदा स्थानीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ा रहे थे। जब मैंने खिताब जीता, तो अपनी कश्मीरी ‘काराकुली टोपी’ और कुर्ता पहन लिया, ताकि मैं कश्मीर को अपने साथ और अपने करीब महसूस कर सकूं।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद थी कि कश्मीर के लोग मेरी जीत का जश्न मनाएंगे, लेकिन दिल्ली में मिले रिस्पॉन्स ने मुझे चौंका दिया। वहां एयरपोर्ट पर लोग मेरे साथ तस्वीरें खिंचवाने आ रहे थे। इसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।’ पुलवामा जिले के छोटे से कस्बे मूरान के रहने वाले 28 वर्षीय ओवैस का बैकग्राउंड साधारण रहा है। वे पत्नी, दो बच्चों, माता-पिता और भाई-बहनों के साथ रहते हैं। परिवार में सबसे बड़े होने के नाते याकूब ने छोटी उम्र में ही कमाना शुरू कर दिया था। ओवैस ने बताया, ‘मेरे पिता छोटे व्यवसायी थे। जब उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा, तो परिवार के भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। मैंने एक ट्रेनर, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) और एक कैटरर के रूप में भी काम किया है। मैंने बागों में सेब तोड़ने और उन्हें पैक करने का काम भी किया है।’ इन सब कामों के बाद वे हमेशा मार्शल आर्ट्स का अभ्यास करते रहे। साल 2018 में उन्होंने ‘चैम्पियन ऑफ चैम्पियंस’ का खिताब जीता और नेशनल ताइक्वांडो प्रतियोगिताओं में बेस्ट फाइटर बॉय के रूप में पहचाने गए। वे बताते हैं, ‘जैसे-जैसे मैं जीतता गया, टीम खबीब में शामिल हो गया। मैंने अमेरिकन किकबॉक्सिंग एकेडमी में सीधे खबीब नूरमागोमेदोव और कोच जेवियर मेंडेज के अंडर ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया।’ विश्व मंच पर इस उपलब्धि के लिए देश भर से प्रशंसा प्राप्त करने के बावजूद, याकूब ने स्थानीय प्रशासन की ओर से मान्यता न मिलने पर अपनी निराशा भी व्यक्त की है। 2015 में खोली एकेडमी, दिग्गज ‘खबीब’ से मिली प्रेरणा साल 2015 में याकूब ने पुलवामा में एकेडमी की स्थापना की। उन्होंने स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए इस एकेडमी की शुरुआत की थी और अब तक 200 से अधिक खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। वे कहते हैं, ‘मैंने थांग-ता, कराटे, किकबॉक्सिंग, ताइक्वांडो से शुरुआत की थी। बाद में मशहूर फाइटर खबीब से प्रेरित होकर एमएमए का रुख किया। तब से, मैं कोचिंग देने के साथ-साथ खुद भी एमएमए की ट्रेनिंग कर रहा हूं।’
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