युद्ध भले ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहा हो, लेकिन इसकी आंच दुनियाभर में फैली हुई है. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद हालात बिगड़े हैं. एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर चापलूसी की हर हद से गुजरने को तैयार हैं तो वहीं ईरान में अटैक और खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में जगह-जगह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं और लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है.
विरोध प्रदर्शन से बिगड़े हालात
पाकिस्तान में ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद हालात बेकाबू होते नजर आए. भीड़ इजरायल और अमेरिका के विरोध में सड़कों पर उतर आई. विरोध प्रदर्शन इतने उग्र हो गए कि भीड़ को काबू करने के लिए सेना और पुलिस को गोलीबारी तक करनी पड़ी. इसमें दर्जनों लोगों की मौत की खबर है.
बोर्ड ऑफ पीस से अलग होने की मांग
यूएस-इजरायल के अटैक से बौखलाए पाकिस्तानियों की ओर से यह भी मांग की जाने लगी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से पाकिस्तान को फौरन अलग हो जाना चाहिए. बता दें, गाजा जैसे संघर्ष में शांति की पहल को बढ़ावा देने के लिए ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बनाया है. पाकिस्तान इसका सदस्य बना है, जिसको लेकर पड़ोसी मुल्क के एक तबके में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है. यूएस-इजरायल के अटैक के बाद यह और भी बढ़ चुका है.
पूर्व पाक राजदूत का भी सामने आया बयान
संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और ब्रिटेन में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने भी अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद पाकिस्तान के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से हटने की बात कही है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने लिखा, ‘अब पाकिस्तान के लिए शांति बोर्ड से बाहर निकलने का समय आ गया है, जिसमें उसे शुरू से ही शामिल नहीं होना चाहिए था. इसकी स्थापना और नेतृत्व ऐसा शख्स करता है, जिसने 7 देशों पर हमले किए हैं. जिसका प्रशासन गाजा में इजरायल के किए जा रहे नरसंहार में शामिल है.’
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