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यह उपचुनाव जन सुराज पार्टी शुरू करने के बाद किशोर की पहली सीधी चुनावी लड़ाई है, जिससे इसका नतीजा बिहार में सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाले मुकाबलों में से एक बन गया है।
उपचुनाव क्यों ज़रूरी था?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए वोटों की गिनती चल रही है और सबकी नज़रें इस बात पर हैं कि क्या पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रशांत किशोर इस सीट पर बीजेपी की लंबे समय से चली आ रही पकड़ को तोड़ पाएंगे या नहीं। कुल 26 उम्मीदवार मैदान में हैं। 30 जुलाई को हुए उपचुनाव में 34.30 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले विधानसभा चुनावों में दर्ज 41.45 प्रतिशत मतदान की तुलना में सात प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट है।
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यह चुनाव तब ज़रूरी हो गया जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद अप्रैल में विधानसभा सीट से इस्तीफ़ा दे दिया। नवीन ने नवंबर 2025 में लगातार पांचवीं बार बांकीपुर सीट जीती थी और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी RJD की रेखा गुप्ता को 50,000 से ज़्यादा वोटों के अंतर से हराया था। RJD ने उपचुनाव में एक बार फिर गुप्ता को मैदान में उतारा है।
यह मुकाबला इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि जन सुराज पार्टी शुरू करने वाले पूर्व चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी, जो 1995 (जब इस सीट को पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था) से यह सीट नहीं हारी है, ने अपनी युवा शाखा के नेता नीरज कुमार सिन्हा को इस गढ़ को बचाने के लिए मैदान में उतारा है।
2025 के विधानसभा चुनावों में बांकीपुर में क्या हुआ था? नितिन नवीन ने 2025 के बिहार चुनावों में बांकीपुर सीट 98,299 वोटों (62.66% वोट शेयर) के साथ जीती थी। उन्होंने RJD की रेखा कुमारी को हराया, जिन्हें 46,363 वोट (29.55%) मिले थे। 51,000 से ज़्यादा वोटों की यह बढ़त इस सीट के हालिया इतिहास में सबसे बड़े अंतरों में से एक है। वहीं, RJD इस बार इस अंतर को कम करके सीट जीतने की कोशिश कर रही है।
इस बीच, गुरुवार को बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में 34% से कुछ ज़्यादा कम वोटिंग दर्ज की गई। इस चुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर दशकों से चले आ रहे BJP के दबदबे को चुनौती दी। चुनाव आयोग के अनुसार, वोटिंग सिर्फ़ 34.24% रही, जो पिछले साल नवंबर के विधानसभा चुनावों में हुई 41.45% वोटिंग के मुकाबले 7% से ज़्यादा कम है।
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