प्रधानमंत्री मोदी के न्यूजीलैंड दौरे पर रिपोर्ट
सबसे पहले बात न्यूजीलैंड की। यह यात्रा इसलिए भी खास रही क्योंकि करीब 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने वहां की आधिकारिक यात्रा की। प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक माओरी रीति से स्वागत किया गया और उसके बाद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ लंबी बातचीत हुई। इस मुलाकात का सबसे बड़ा फैसला दोनों देशों के रिश्तों को नई रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाना रहा। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच कारोबार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया। दोनों पक्षों ने मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने पर भी सहमति जताई ताकि दोनों देशों के व्यापारियों और उद्योगों को सीधा लाभ मिल सके।
न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर कई बड़े कदम उठाए गए। दोनों देशों की नौसेनाएं अब जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की रसद सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगी। समुद्र से जुड़ी जानकारियां साझा होंगी, संयुक्त अभ्यास बढ़ेंगे और समुद्री सुरक्षा पर हर साल नियमित बातचीत होगी। आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्य समूह बनाने का भी फैसला हुआ जिससे दोनों देश जानकारी साझा कर आतंक के खिलाफ मिलकर काम करेंगे।
इसके अलावा भूकंप, सुनामी और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ेगा। डेयरी और पशुपालन के क्षेत्र में न्यूजीलैंड की आधुनिक तकनीक भारत तक पहुंचेगी। पर्यटन, खेल, संस्कृति, समुद्री विरासत, खाद्य तकनीक और समुद्री अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी कई समझौते हुए। नागालैंड और उत्तराखंड में कीवी फल के लिए दो उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे ताकि किसानों को बेहतर तकनीक और अधिक उत्पादन का लाभ मिल सके। न्यूजीलैंड ने वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में शामिल होने का भी फैसला किया। अंटार्कटिका अनुसंधान, खाद्य तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच नए सहयोग का रास्ता खुला है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए न्यूजीलैंड ने अपना समर्थन दोहराया और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर भी दोनों देश एकमत दिखाई दिए।
प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रिपोर्ट
अब बात ऑस्ट्रेलिया की। मेलबर्न में हुई वार्षिक शिखर बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती दी। नई संयुक्त रक्षा घोषणा के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच तालमेल बढ़ाने, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, नई तकनीक और समुद्री कानूनों के पालन पर साथ काम करने का फैसला हुआ। समुद्री सुरक्षा के लिए अलग कार्ययोजना बनी और दोनों देशों के तटरक्षक बलों के बीच भी नया समझौता हुआ।
ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों ने साथ मिलकर काम करने का भरोसा दोहराया। लंबे समय से लंबित असैन्य परमाणु समझौते को पूरी तरह लागू करने का रास्ता साफ हुआ, जिससे भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति आसान होगी। नई तकनीक, साइबर सुरक्षा और जरूरी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी नई साझेदारी बनी।
शिक्षा और कौशल विकास में भी कई महत्वपूर्ण फैसले हुए। खनन क्षेत्र के लिए भुवनेश्वर में उत्कृष्टता केंद्र बनेगा। ऑस्ट्रेलिया के दो प्रमुख विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर खोलेंगे जिससे भारतीय छात्रों को विदेश जाए बिना बेहतर शिक्षा का अवसर मिलेगा। दोनों देशों के कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के बीच भी सहयोग बढ़ेगा।
इस यात्रा की एक खास उपलब्धि भारत की प्राचीन धरोहरों की वापसी भी रही। नंदी, भगवान कार्तिकेय और मां काली से जुड़ी तीन दुर्लभ प्राचीन मूर्तियां ऑस्ट्रेलिया ने भारत को लौटाने का फैसला किया। इसके अलावा सौर ऊर्जा, विज्ञान, फिल्म निर्माण, पारंपरिक ज्ञान, खनिज खोज और औषधि अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी कई नए समझौते हुए।
प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे पर रिपोर्ट
प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे की शुरुआत इंडोनेशिया से हुई जहां दोनों देशों ने अपने पुराने रिश्तों को और मजबूत बनाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई बातचीत में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य, कृषि, विज्ञान, अंतरिक्ष, ऊर्जा, शिक्षा और संस्कृति जैसे लगभग हर क्षेत्र पर विस्तार से चर्चा हुई।
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सबसे बड़ी बात यह रही कि दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का फैसला किया। ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों पर सहयोग बढ़ेगा। समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास, तटरक्षक बलों के बीच तालमेल और जहाज निर्माण में भी साथ काम होगा। भारत और इंडोनेशिया आतंकवाद के खिलाफ भी मिलकर काम करेंगे और नई तकनीक का गलत इस्तेमाल रोकने पर भी सहयोग बढ़ेगा।
व्यापार बढ़ाने, दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति मजबूत करने, इस्पात उद्योग में संयुक्त निवेश करने और दोनों देशों की मुद्राओं में लेन-देन बढ़ाने पर भी सहमति बनी। स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाइयों के मानकों, चिकित्सा कर्मचारियों के प्रशिक्षण और खाद्य सुरक्षा पर समझौते हुए। कृषि, उर्वरक, ऊर्जा, दूरसंचार, विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और आपदा प्रबंधन में भी नए समझौते हुए।
दोनों देशों ने समुद्री और हवाई संपर्क बढ़ाने, सबांग बंदरगाह के विकास में सहयोग, डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने और छोटे कारोबारियों को डिजिटल बाजार से जोड़ने की दिशा में भी कदम बढ़ाया। साथ ही सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए प्रंबानन मंदिर के संरक्षण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा और दोनों देशों ने अगले दो वर्षों को गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर और की हजर देवंतरा की सांस्कृतिक स्मृति के रूप में मनाने का फैसला भी किया।
बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी का यह तीन देशों का दौरा कई मायनों में सफल माना जा सकता है। न्यूजीलैंड के साथ ऐतिहासिक नई साझेदारी बनी, ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा, शिक्षा और ऊर्जा संबंधों को नई मजबूती मिली, जबकि इंडोनेशिया के साथ समुद्री सुरक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग का नया रास्ता खुला। इन समझौतों का असर आने वाले वर्षों में भारत की सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा, कृषि, ऊर्जा और रोजगार जैसे कई क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि इस पूरे दौरे को भारत की विदेश नीति के लिए एक मजबूत और दूरगामी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
-नीरज कुमार दुबे
(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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