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प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने सोमवार को कहा कि राज्यों में महिलाओं से जुड़ी नकद सहायता योजनाओं की राशि की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। परिषद ने कहा कि नकद राशि महंगाई बढ़ने और परिवारों के खर्च में बदलाव को देखते हुए जरूरत पड़ने पर बढ़ाई जानी चाहिए।
ईएसी-पीएम ने अपनी रिपोर्ट में महाराष्ट्र की माझी लाडकी बहिन योजना और ओडिशा की सुभद्रा योजना का अध्ययन किया। रिपोर्ट में कहा गया कि इन योजनाओं से महिलाओं की बचत बढ़ी, घरेलू खर्च में मदद मिली और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि नकद सहायता के साथ महिलाओं को डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से भी जोड़ा जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से और मजबूत बन सकें।

कैश स्कीम से UPI बढ़ा
नकद सहायता मिलने के बाद यूपीआई से भुगतान भी बढ़ा। महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी चीजों पर पहले से ज्यादा खर्च करने लगी हैं।
ईएसी-पीएम के अनुसार, 15 से ज्यादा राज्यों में महिलाओं को सीधे बैंक खाते में नकद सहायता दी जा रही है। इन योजनाओं का लाभ करीब 12 करोड़ महिलाओं को मिल रहा है।
परिषद का कहना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने से परिवार की स्थिति बेहतर होती है और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ती है। इसलिए महंगाई के अनुसार सहायता राशि की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए।

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