दिलचस्प बात यह है कि 28 वर्षीय अवैस का बचपन एक ऐसे गांव में बीता, जहां कई सालों तक इंटरनेट की सुविधा नहीं थी। फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत और जिज्ञासा के दम पर अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की।
गांव में नहीं था इंटरनेट
दिलचस्प बात यह है कि 28 वर्षीय अवैस का बचपन एक ऐसे गांव में बीता, जहां कई सालों तक इंटरनेट की सुविधा नहीं थी। फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत और जिज्ञासा के दम पर अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की। चलिए आज सक्ससे स्टोरी की कड़ी में अवैस अहमद की कहानी जानते हैं।
पिता का अहम योगदान
कहते हैं कि किसी भी सफलता के पीछे किसी ना किसी व्यक्ति का हाथ होता है। अवैस की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का भी बड़ा योगदान रहा। उन्होंने बेटे की जिज्ञासा को हमेशा बढ़ावा दिया और उसे सीखने के लिए जरूरी माहौल और किताबें उपलब्ध कराईं। यही प्रोत्साहन उन्हें गांव से लेकर NASA तक के सफर पर ले गया।
किताबों ने जगाई अंतरिक्ष की जिज्ञासा
अवैस अहमद का बचपन आज के बच्चों से काफी अलग था। उस समय उनके पास इंटरनेट नहीं था, इसलिए उनके पिता ने तकनीक की बजाय किताबों में निवेश किया। अवैस के पिता नदीम अहमद, जो कर्नाटक के अलदूर में एक मेडिकल स्टोर (फार्मेसी) चलाते हैं, उनके लिए नियमित रूप से विज्ञान से जुड़ी किताबें लाते थे। द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट में अवैस ने बताया कि उन्हें बचपन से ही सौर मंडल, नीहारिकाओं (नेबुला) और ब्लैक होल जैसी चीजों के बारे में पढ़ना बेहद पसंद था। इन्हीं किताबों ने उनके मन में अंतरिक्ष के प्रति गहरी जिज्ञासा पैदा की।
उनकी मां गजाला तश्फीन और पिता ने हमेशा उन्हें उसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें उनकी सबसे ज्यादा रुचि थी। यही समर्थन आगे चलकर उनकी सफलता की मजबूत नींव बना।
बेटे की जिज्ञासा और शिक्षा पर किया हर कमाई का निवेश
अवैस अहमद के पिता नदीम अहमद आज भी अपने बेटे के बचपन को याद करते हैं। उन्होंने बताया कि वह हर सप्ताह अवैस को चिक्कमगलूर के सुब्बाराव एंड संस बुक स्टॉल पर ले जाते थे, जहां से उसके लिए विज्ञान की किताबें खरीदते थे। उन्होंने बताया कि अवैस को विज्ञान से जुड़ी किताबें पढ़ने का बहुत शौक था और वह घंटों पढ़ाई में डूबे रहते थे। नदीम अहमद ने कहा कि उन्होंने अपनी ज्यादातर कमाई बेटे की पढ़ाई और उसके सपनों को पूरा करने में लगा दी, ताकि वह अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।
मेहनत और माता-पिता के त्याग ने दिलाई सफलता
जैसे-जैसे अवैस अहमद बड़े हुए, उनकी जिज्ञासा एक बड़े लक्ष्य में बदल गई। उनके पिता नदीम अहमद बताते हैं कि अवैस अपनी पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थे। वह रात 2 बजे तक पढ़ाई करते थे और सुबह जल्दी उठकर फिर से पढ़ने बैठ जाते थे। उनके मुताबिक, सिर्फ माता-पिता ही जानते हैं कि बेटे ने सफलता के लिए कितनी मेहनत की। बाद में अवैस का दाखिला BITS पिलानी में हुआ, जहां उन्होंने ड्यूल डिग्री की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान वह यूनिवर्सिटी के छात्र-नेतृत्व वाले सैटेलाइट प्रोजेक्ट टीम अनंत से जुड़े। इसी दौरान उनकी मुलाकात क्षितिज खंडेलवाल से हुई, जो आगे चलकर उनके बिजनेस पार्टनर बने।
पढ़ाई के लिए लिया एजुकेशन लोन और गिरवी रखे गहने
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अवैस के पिता ने बताया कि बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया और जरूरत पड़ने पर अपने सोने के गहने भी गिरवी रख दिए, ताकि उसकी पढ़ाई में कोई कमी न आए। आज बेटे की सफलता पर पूरा परिवार गर्व महसूस करता है।
2019 में की थी पिक्सल की स्थापना
साल 2019 में अवैस अहमद और क्षितिज खंडेलवाल ने मिलकर Pixxel की स्थापना की। कंपनी का उद्देश्य ऐसे हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट विकसित करना था, जो पारंपरिक सैटेलाइट की तुलना में पृथ्वी की कहीं अधिक बारीकी से तस्वीरें और डेटा उपलब्ध करा सकें। अवैस की कहानी यह बताती है कि उनकी सफलता की शुरुआत किसी बड़ी तकनीक या संसाधन से नहीं, बल्कि बचपन में अंतरिक्ष के प्रति पैदा हुई जिज्ञासा, माता-पिता के भरोसे, किताबों और उनके त्याग से हुई थी। यही छोटी-छोटी बातें आगे चलकर उन्हें NASA के साथ काम करने वाली कंपनी का संस्थापक बनाने तक ले गईं।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.