Patna University LLB Paper Leak: पटना यूनिवर्सिटी की एलएलबी प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र दोपहर 12:02 बजे सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। विवि प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और रिपोर्ट आने के बाद रद्द करने पर फैसला होगा।
दोपहर 12:02 बजे वायरल हुआ पर्चा और संभावित उत्तर
परीक्षा नियंत्रक बी. के. लाल के अनुसार, प्रश्नपत्र दोपहर ठीक 12:02 बजे सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। हैरान करने वाली बात यह है कि प्रश्नपत्र की तस्वीरों के साथ संभावित उत्तरों का एक पन्ना भी वायरल किया गया।
शुरुआती तस्वीरों में दिख रही बेंच के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि यह तस्वीर पटना कॉलेज परीक्षा केंद्र की हो सकती है। हालांकि, अभी यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं है कि पर्चा पटना कॉलेज, बीएन कॉलेज या मगध महिला कॉलेज में से किस केंद्र से बाहर आया।
प्रशासन के दावे और खड़े होते गंभीर सवाल
घटना के सामने आते ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कई सवाल उठने लगे हैं:
जब केंद्रों पर कड़ी जांच थी, तो मोबाइल फोन परीक्षा कक्ष तक कैसे पहुंचा?
क्या किसी अभ्यर्थी ने फोटो खींचकर मोबाइल बाहर फेंका या कोई और रास्ता अपनाया?
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने कहा, “परीक्षा हॉल से प्रश्नपत्र लीक होने की गुंजाइश नहीं है क्योंकि परीक्षा जैमर की व्यवस्था के बीच हुई थी। जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।” वहीं परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट किया कि भले ही पर्चा वायरल हुआ, लेकिन संभावित उत्तर परीक्षा कक्ष के अंदर अभ्यर्थियों तक नहीं पहुंच सके।
कॉलेजों के प्राचार्यों की सफाई और जांच की स्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ संदिग्ध छात्रों के मोबाइल फोन जब्त कर जांच की गई, लेकिन उनमें से प्रश्नपत्र वायरल होने का कोई सीधा प्रमाण नहीं मिला। बीएन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) राजकिशोर प्रसाद ने दावा किया कि उनके केंद्र से पर्चा लीक नहीं हुआ है और छात्रों को कड़ी जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया था। पटना कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार ने माना कि प्रश्नपत्र लीक हुआ है, लेकिन उन्होंने अपने कॉलेज से लीक होने की बात से साफ इनकार किया।
क्या रद्द होगी परीक्षा?
विश्वविद्यालय प्रशासन अब केंद्रों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगाल रहा है ताकि दोषी छात्र या व्यक्ति की पहचान की जा सके। परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने और कुलपति के अंतिम निर्देश के बाद ही परीक्षा रद्द करने या आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले अभ्यर्थी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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