Om Chouksey NEET Success Story: फुटपाथ पर बैग बेचने वाले के बेटे ओम चौके ने आर्थिक तंगी को मात देकर एक साथ NEET, JEE और CUET जैसी तीन बड़ी परीक्षाएं पास कर मिसाल कायम की। सीएम मोहन यादव ने भी उनकी सराहना की।
फुटपाथ पर बैग बेचकर पिता ने संभाला परिवार
ओम चौकसे का बचपन संघर्षों के बीच बीता। उनके पिता इंदौर में फुटपाथ पर स्कूल और ट्रैवल बैग बेचने का काम करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सीमित थी, लेकिन इसके बावजूद उनके माता-पिता ने ओम की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।
ओम को भी अपने परिवार के संघर्ष का पूरा अहसास था। उन्होंने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय अपनी लगन और दिन-रात की कड़ी मेहनत को ही अपना हथियार बनाया। किसी महंगी कोचिंग और सुविधाओं के बिना, उन्होंने सीमित संसाधनों का सही उपयोग करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी।
एक साथ तीन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में गाड़े झंडे
अभ्यर्थी किसी एक ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए वर्षों मेहनत करते हैं, लेकिन ओम ने एक साथ तीन अलग-अलग स्ट्रीम की कठिन परीक्षाओं को पास कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। ओम चौकसे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से पूरी की।उन्होंने मध्य प्रदेश बोर्ड की 10वीं परीक्षा में प्रदेश की मेरिट सूची में 7वीं रैंक हासिल की।इसके बाद 12वीं की बोर्ड परीक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य स्तर पर 10वीं रैंक प्राप्त की है।
NEET (नीट) मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 720 में से 521 अंक लाककर शानदार सफलता प्राप्त की। JEE (जेईई) इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा को बेहतरीन अंकों के साथ क्रैक किया।CUET (सीयूईटी) में देश के टॉप केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आयोजित कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट में भी सफलता का परचम लहराया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की सराहना
ओम चौकसे की इस अद्भुत उपलब्धि की जानकारी जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची, तो उन्होंने ओम और उनके परिवार को बधाई दी तथा सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी खुलकर तारीफ की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओम चौकसे की यह सफलता उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को पूरा करने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने ओम के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके माता-पिता के त्याग और समर्पण को सलाम किया। ओम की यह कहानी साबित करती है कि सफलता सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। सच्ची लगन, अनुशासन और निरंतर प्रयास से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
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