ओला ने अपना नया इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च किया है। इसका नाम S1Z है। यह दो बैटरी ऑप्शन में आता है। इसकी क्लेम्ड रेंज 301 किलोमीटर तक की है। इसमें कंपनी क्रूज कंट्रोल के साथ कई शानदार फीचर ऑफर कर रही है।
भारत में बने भारत से लैस
ओला S1Z में कंपनी के भारत सेल प्लेटफॉर्म के 46-सीरीज LFP (लिथियम आयरन फॉस्फेट) सेल इस्तेमाल किए गए हैं। इन सेल को ओला ने बेंगलुरु के Battery Innovation Centre में डिवेलप किया है। इन्हें तमिलनाडु की Gigafactory में तैयार किया जाता है। LFP बैटरी में NMC सेल की तुलना में बेहतर थर्मल स्टेबिलिटी और लंबी साइकल लाइफ जैसी खूबियां होती हैं। साथ ही इनमें थर्मल रनअवे का खतरा भी कम माना जाता है। रेंज की बात करें तो 3.1kWh बैटरी वाला S1Z IDC टेस्ट के अनुसार 179km तक चल सकता है। वहीं, बड़े 5.1kWh बैटरी पैक वाला वर्जन एक बार चार्ज करने पर 301km तक की क्लेम्ड रेंज देता है।
कई स्मार्ट फीचर्स से लैस
S1Z कंपनी के MoveOS 5 सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म पर काम करता है। इसमें क्रूज कंट्रोल, एडवांस्ड रीजनरेटिव ब्रेकिंग, रिवर्स मोड, GPS नेविगेशन और OTA सॉफ्टवेयर अपडेट जैसे फीचर्स मिलते हैं। स्कूटर में जियो, टाइम और मोड फेंसिंग फीचर भी दिया गया है। इसके जरिए मालिक यह तय कर सकते हैं कि स्कूटर को कहां, किस समय और किस राइडिंग मोड में इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह फीचर खासतौर पर फैमिलीज और फ्लीट ऑपरेटरों के लिए काम का साबित हो सकता है। इसके अलावा ईजी पार्क फीचर तंग जगहों पर स्कूटर को कम स्पीड पर आसानी से पार्क करने में मदद करता है। राइडिंग स्टैटिस्टिक्स और एनर्जी यूसेज से जुड़ी जानकारी ओला इलेक्ट्रिक ऐप के जरिए देखी जा सकती है।
दिसंबर 2026 से शुरू होगी डिलीवरी
Ola S1Z के 3.1kWh वर्जन की डिलीवरी दिसंबर 2026 से शुरू होगी, जबकि 5.1kWh वर्जन की डिलीवरी मार्च 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। स्कूटर को White, Anthracite, Sky Splash Blue और Matcha Green समेत चार कलर ऑप्शन में लाया गया है। दोनों वेरिएंट में 12-इंच के व्हील्स मिलते हैं।
डीलर नेटवर्क से बिकेगा S1Z
S1Z की लॉन्चिंग ओला इलेक्ट्रिक के रिटेल मॉडल में भी बड़ा बदलाव लेकर आई है। यह कंपनी का पहला मॉडल होगा जिसे डीलर-ऑपरेटेड स्टोर्स के जरिए बेचा जाएगा। इससे पहले ओला अपने company-owned रिटेल नेटवर्क पर निर्भर थी। कंपनी का टारगेट इस नए डीलर नेटवर्क के जरिए भारत के छोटे शहरों और कस्बों तक अपनी पहुंच बढ़ाना है, जहां उसके कंपनी-ऑपरेटेड स्टोर अपेक्षाकृत कम हैं।
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