अगर उसी एक्सचेंज के अपने शेयर भी वहीं ट्रेड हों, तो वह अपने ही शेयरों की निगरानी करने की स्थिति में आ जाएगा। इससे सेल्फ-सुपरविजन और संभावित छेडछाड़ को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
यही वजह है कि SEBI के नियमों में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज को अपनी securities किसी दूसरे मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करने की व्यवस्था है। एनएसई के मामले में इसका मतलब है कि IPO के बाद एनएसई के शेयर BSE पर ट्रेड होंगे, एनएसई पर नहीं।
पहले आई थी यह खबर
हालांकि, कुछ समय पहले यह खबर आई थी कि एनएसई अपने शेयरों को BSE पर लिस्ट कराने के बाद उन्हें एनएसई पर ‘permitted to trade’ कैटेगरी में लाने की संभावना पर विचार कर रहा था। लेकिन अब एनएसई के CEO का ताजा बयान बताता है कि इस दिशा में SEBI से अनुमति लेने के लिए कोई आवेदन नहीं किया गया है।
निवेशकों के लिए इसके क्या हैं मायने
प्रैक्टिकली यह नियम एनएसई के IPO की निवेश कहानी को कमजोर नहीं करता। एनएसई के शेयरों की लिस्टिंग BSE पर होने के कारण निवेशक वहां इसकी खरीद-बिक्री कर सकेंगे। असली सवाल एनएसई की लिस्टिंग के बाद उसके वैल्युएशन, मार्कट में दबदबा, ग्रोथ और IPO प्राइसिंग का होगा।
एनएसई का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है। यानी IPO से मिलने वाला पैसा एनएसई के पास नई पूंजी के रूप में नहीं जाएगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे। BSE खुद एनएसई पर लिस्टेड है। ऐसे में एनएसई के BSE पर लिस्ट होने के बाद भारत के दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज एक-दूसरे के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होंगे। हालांकि एनएसई अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेड नहीं होगा।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)
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