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न केवल खतरे बढ़ रहे हैं, बल्कि हमारे साधन और संस्थागत तंत्र भी इन संघर्षों को हल करने या कम करने के लिए तेजी से अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। बहुपक्षवाद (Multilateralism) कमजोर हो रहा है। ब्रिक्स की कल्पना एक अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक अनौपचारिक समूह के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज को मजबूत करना था। इसने वैश्विक शासन में सुधार और संस्थागत सुधारों की भी परिकल्पना की थी। ब्रिक्स देशों का यह समूह एक बहुत ही विशेष गठबंधन है, जो शांति, प्रगति, विकास और सहयोग में विश्वास रखता है। और मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि यह दिन-प्रतिदिन मजबूत होता जा रहा है।
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यह कोई साधारण समूह नहीं है। यह 4.1 अरब (4.1 बिलियन) लोगों का घर है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 49% यानी करीब आधा हिस्सा है। साथ मिलकर, यह वैश्विक संपत्ति के निर्माण में 31 से 32 ट्रिलियन डॉलर (यानी $31.5 ट्रिलियन) का योगदान देता है। यह जीडीपी (GDP) वैश्विक हिस्सेदारी के 30% से भी अधिक है। इसके पास 42 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक का भूभाग है, जो हमारे ग्रह का 28% हिस्सा है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका वैश्विक विस्तार है।
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