लो ब्लड प्रेशर को हाइपोटेंशन भी कहा जाता है। बच्चों में यह समस्या देखने को मिलती है। हालांकि बड़ों की तुलना में बच्चों में यह समस्या कम होती है। लेकिन इसके बाद भी पेरेंट्स को बच्चों में लो बीपी की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। ब्लड प्रेशर, ब्लड का वह दबाव है, जिससे ब्लड धमनियों की दीवारों से टकराता है। लेकिन बच्चों में सामान्य ब्लड प्रेशर कई कारकों पर भी निर्भर करता है। जैसे उनकी लंबाई, लिंग और उम्र आदि के आधार पर। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बच्चों में लो ब्लड प्रेशर के कारण, लक्षण और जरूरी टिप्स आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।
नवजात शिशु में 60/40 mmHg
1-5 साल के बच्चे में 80/50 से 95/60 mmHg
किशोरावस्था में 110/70 से 120/80 mmHg
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जब बच्चे का ब्लड प्रेशर उनकी हाइट, उम्र और लिंग के मानक स्तर से नीचे चला जाता है, तो वह हाइपोटेंशन की स्थिति होती है।
छोटे बच्चों में लो बीपी की मुख्य
डिहाइड्रेशन
बच्चों में लो ब्लड प्रेशर का सबसे प्रमुख और सामान्य कारण डिहाइड्रेशन है। जब भी किसी बच्चे के शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है, तो इसका असर ब्लड वॉल्यूम पर भी पड़ता है। ब्लड वॉल्यूम कम होने से धमनियों की दीवारों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है, जिससे बीपी लो हो जाता है। आमतौर पर बच्चों में यह स्थिति बार-बार उल्टी होना, दस्त, तेज बुखार या ज्यादा पसीना आना होता है।
इलेक्ट्रोलाइट्स इंबैलेंस
बच्चों के शरीर में जब भी पानी की मात्रा कम हो जाती है, तो न सिर्फ शरीर डिहाइड्रेट होता है, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस भी होने लगता है। ऐसेमें हृदय को अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। जिससे बीपी लो हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को चक्कर आ सकते हैं, वह बेहोश हो सकता है या फिर सुस्त पड़ सकता है।
संक्रमण
संक्रमण बच्चों में लो बीपी की वजह बन सकता है। जिससे बच्चों में सेप्टिक शॉक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। जब किसी संक्रमण की वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा सक्रिय हो जाती है। इस कारण शरीर में सूजन पैदा हो सकती है। जिससे टिश्यूज को नुकसान पहुंचता है और बीपी का स्तर खतरनाक रूप से कम हो जाता है।
पोषक तत्वों की कमी होना
जब बच्चे सही डाइट नहीं फॉलो करते हैं, जिस कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। अगर बच्चे के शरीर में फोलेट और विटामिन बी12 की कमी हो जाती है, तो बॉडी में पर्याप्त मात्रा में रेड ब्लड सेल्स नहीं बन पाते हैं, जिससे बच्चे को एनीमिया हो सकता है और बीपी कम रह सकता है।
हृदय संबंधी समस्याएं
अगर बच्चे के जन्म से ही दिल में छेद है या हृदय की मांसपेशियां कमजोर हैं। वहीं वह शरीर के अंगों तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड पंप नहीं कर पाता, जिससे ब्लड प्रेशर लो हो जाता है।
हार्मोनल समस्याएं
जब बच्चों में थायराइड एड्रिनल ग्लैंड से जुड़ी समस्या होती है, तो उनको लो बीपी की समस्या हो सकती है। अगर बच्चे का ब्ल़ड शुगर लो हो जाता है, तो इसकी वजह से ब्लड प्रेशऱ के लेवल में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।
लो ब्लड प्रेशर के लक्षण
धुंधला दिखाई देना
चेहरे का रंग सफेद नजर आना
हाथ-पैर ठंडे पड़ जाना
चक्कर आना या बेहोशी
थकान और सुस्ती
सांस लेने में तकलीफ आना
एकाग्रता में कमी
बार-बार प्यास लगना
शॉक
बच्चों में यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें बॉडी के सभी अंगों और टिश्यूज तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड फ्लो नहीं होता है। जिस कारण ऑक्सीजन बाधित होने लगती है। शॉक के शुरूआती चरणं में बच्चे का शरीर हृदय गति बढ़ाकर बीपी को स्थिर रखने की कोशिश करता है। लेकिन जैसे-जैसे शॉक बढ़ता है और हृदय की मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती है। वहीं ब्लड फ्लो पर असर दिखने लगता है। यह एक गंभीर और जानलेवा स्थिति भी है।
लगातार बेहोश होना
अगर आपका बच्चा बार-बार बेहोश हो रहा है, तो पेरेंट्स को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सामान्य स्थिति नहीं है। जब बीपी का स्तर लो काफी कम हो जाता है, तो दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त ब्लड नहीं मिल पाता है। इस कारण बच्चे बार-बार बेहोश होने लगता है। यह स्थिति संकेत देती है कि शरीर का सर्कुलेटरी सिस्टम गंभीर दबाव में है और शरीर के अंगों को नुकसान हो सकता है।
नीला पड़ना
बीपी लो होने के कारण शरीर के अंगों तक सही तरह से ऑक्सीजन सप्लाई नहीं होता है। ऑक्सीजन की भारी कमी की वजह से बच्चे के नाखून, होंठ और स्किन का रंग नीला पड़ने लगता है। यह एक गंभीर संकेत होता है कि शरीर की जरूरतों को हृदय और फेफड़े पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
बच्चे में कैसे की जाती है लो ब्लड प्रेशर की जांच
मेडिकल हिस्ट्री
बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री और वह जो भी दवाएं ले रहा है, इसकी जानकारी होने के बाद ही बच्चे का बीपी का ट्रीटमेंट शुरू हो सकता है।
बीपी मॉनिटरिंग
बच्चे में लो बीपी के ट्रीटमेंट से पहले अलग-अलग स्थितियों जैसे लेटकर, बैठकर या खड़े होकर बीपी चेक किया जाता है।
ब्लड टेस्ट
हालांकि कुछ मामलों में ब्लड टेस्ट करना पड़ सकता है। जिससे कि यह पता लगाया जा सके कि बच्चे का ब्लड प्रेशर क्यों लो है। इन टेस्ट के जरिए शुगर लेवल, एनीमिया और संक्रमण का पता लगाया जाता है।
ईसीजी और इकोकार्डियोग्राम
हृदय की धड़कन और संरचना की जांच के लिए ऐसी जांच की जाती है।
जानिए पेरेंट्स क्या करें
डाइट
आप डॉक्टर की सलाह पर बच्चे की डाइट में नमक की मात्रा बढ़ा सकती हैं। लो बीपी को सामान्य रखने में सोडियम मदद करता है।
हाइड्रेटेड रखें
बच्चे को हाइड्रेटेड रहने की सलाह दें। इससे शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा संतुलित रहती है। आप इलेक्ट्रोलाइट को बैलेंस करने के लिए बच्चे को नारियल पानी दे सकते हैं। इससे बच्चा हेल्दी रहता है और हेल्दी बच्चों में बीपी का लेवल भी संतुलित बना रहता है।
कई मील दें
हैवी मील लेने के बाद ब्लड प्रेशर का लेवल गिर जाता है। इसलिए बच्चे को दिन में तीन हैवी मील देने के बजाय दिन भर में 5 से 6 बार छोटे-छोटे मील देना चाहिए।
डॉक्टर के पास जाएं
सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो रही हो।
बच्चे को काला मल या फिर खून की उल्टी आ रही हों।
बच्चा बेहोश हो गया हो
तेज फीवर के साथ बॉडी पर चकत्ते और लो बीपी हो।
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