फीफा वर्ल्ड कप 2026 में नॉर्वे के फुटबॉल फैंस का ‘वाइकिंग रो’ (Viking Row) सेलिब्रेशन पूरी दुनिया में छा गया है। न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक टाइम्स स्क्वायर से लेकर बोस्टन की सड़कों और वर्ल्ड कप के स्टेडियमों तक, हर जगह नॉर्वे के फैंस एक साथ बैठकर नाव चलाने (रोइंग) की एक्टिंग करते और जश्न मनाते नजर आ रहे हैं। यह अनोखा नजारा इस वर्ल्ड कप की सबसे खास पहचान बन गया है, बिल्कुल वैसे ही जैसे 2016 के यूरो कप में आइसलैंड का ‘थंडर क्लैप’ मशहूर हुआ था। इस जश्न का तरीका देखने और सुनने में बेहद रोमांचक है। इसकी शुरुआत में सबसे पहले नॉर्वे का एक पारंपरिक हॉर्न बजाया जाता है, जिसके बाद सभी फैंस जमीन पर एक लाइन में बैठ जाते हैं, मानो वे किसी पुरानी ‘वाइकिंग लॉन्गबोट’ (समुद्री नाव) में बैठे हों। फिर एक लीडर ड्रम बजाना शुरू करता है। शुरुआत में बीट बहुत धीमी होती है, जो धीरे-धीरे तेज होती जाती है। ड्रम की बीट के साथ हजारों फैंस एक साथ अपने हाथों से नाव चलाने का एक्शन करते हैं और पूरी ताकत से ‘रो!’ चिल्लाते हैं। मैदान में जब हजारों लोग एक साथ यह करते हैं, तो स्टेडियम का माहौल रोंगटे खड़े कर देने वाला हो जाता है। आमतौर पर फुटबॉल के ऐसे चेंट्स अपने आप बन जाते हैं, लेकिन ‘वाइकिंग रो’ की कहानी अलग है। इसकी शुरुआत छह महीने पहले नॉर्वे की राजधानी ओस्लो के एक पब में हुई थी। ओले फ्रोयस्टैड नाम के एक प्राइमरी स्कूल टीचर ने अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए गानों और नारों की एक खास लिस्ट तैयार की थी। फ्रोयस्टैड ने सपोर्टर्स ग्रुप के लीडर टॉर्स्टेन हैमरान को यह आइडिया बताया और नॉर्वे के ऐतिहासिक योद्धाओं (वाइकिंग्स) के नाव चलाने के तरीके को फुटबॉल से जोड़ दिया। शुरुआत में अभ्यास मैचों के दौरान फैंस इसे ठीक से नहीं कर पा रहे थे, इसलिए फ्रोयस्टैड ने सोशल मीडिया पर ट्यूटोरियल वीडियो डाले ताकि लोग सही तरीके से अपनी कमर झुकाकर इसे कर सकें। नॉर्वे के स्ट्राइकर अर्लिंग हालेंड और कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड भी इसके दीवाने हो चुके हैं। इतिहासकार तेर्जे लेइरेन बताते हैं कि ‘वाइकिंग’ शब्द का मतलब घर से दूर जाकर जीत हासिल करना है और नॉर्वे की टीम वर्ल्ड कप में यही कर रही है।
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