काठमांडू, एक सितंबर नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सुरक्षाबलों ने आठ जिलों से और शव बरामद किए हैं जिससे इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार को 1,050 हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बचावकर्मियों को रुक-रुककर हो रही बारिश और कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के बीच फंसे लोगों का पता लगाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इस बीच, बाढ़ की नयी चेतावनी भी जारी की गई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक और 83 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इसने कहा कि लगभग 12,000 लोगों को बचा लिया गया है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ का पानी अपने साथ निचले इलाके की ओर ले गई, जिससे घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। चीनी मीडिया में आई खबरों के अनुसार, इस आपदा में चीन की ओर भी 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में करीब 550 लोग अब भी लापता हैं।
एनडीआरएमए के अनुसार, चितवन जिले में सबसे अधिक 321 शव बरामद किए गए। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 216, नवलपरासी वेस्ट में 170, नुवाकोट में 142, गोरखा में 65, धाडिंग में 57, रसुवा में 41 और तनहुन में 38 शव बरामद किए गए। चिकित्सा केंद्रों पर लोगों की भारी भीड़ देखी गई; जो अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें लिए हुए थे और दीवारों पर चिपकाई गई मृतकों की तस्वीरों को ध्यान से देख रहे थे।
अधिकारियों ने बताया कि देश भर के 21 अस्पतालों में अज्ञात शव रखे गए हैं। पहचान करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि कई शव बुरी तरह सड़-गल चुके हैं या पानी के बहाव में बहकर आने के बाद केवल आंशिक अवशेषों के रूप में ही मिल पाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक बरामद किए गए कुल शवों में से पहचान के बाद केवल 60 शव ही परिजनों को सौंपे गए, जबकि लगभग 700 शवों को दस्तावेजीकरण और पहचान संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के बाद दफना दिया गया।
बचाव दल बाढ़ प्रभावित इलाकों में मौजूद अलग-अलग पनबिजली परियोजनाओं के स्थानों पर 683 कर्मचारियों और कामगारों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इनमें से कई लोग सुरंगों में फंसे हुए हैं। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीम इन अभियानों में नेपाल के बचावकर्मियों की मदद कर रही हैं।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत की खास सुरंग बचाव टीम ने दो पनबिजली परियोजना स्थलों पर सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि टीम ने चिलिमे में एक सुरंग के अंदर अपनी जगह बनाई और लांगटांग में 185 मीटर तक जांच कर रही है। नेपाल में प्राधिकारियों ने मंगलवार को देश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों के कई जिलों में बाढ़ के खतरे को लेकर नया अलर्ट जारी किया और नदियों के आसपास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने तथा एहतियाती कदम उठाने की अपील की।
एनडीआरआरएमए की ओर से जारी एक सूचना के अनुसार, नुवाकोट और रसुवा जिलों में अचानक बाढ़ आने की काफी अधिक आशंका है। इन इलाकों में छोटी नदियों और जलधाराओं का जलप्रवाह बढ़ने का अनुमान है। इसके अलावा ताप्लेजुंग, संखुवासभा, सोलुखुम्बु, खोटांग, ओखलढुंगा, रामेछाप, दोलखा, सिंधुपालचोक, काभ्रेपलांचोक, ललितपुर, भक्तपुर, काठमांडू और धादिंग समेत पूर्वी और मध्य नेपाल के कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने का खतरा है।
इन इलाकों में अचानक बाढ़ आने का मध्यम स्तर का जोखिम भी जताया गया है। प्राधिकरण के मुताबिक, पश्चिमी नेपाल में गोरखा, लमजुंग, डोल्पा, रुकुम पूर्व, रुकुम पश्चिम, जाजरकोट, दार्चुला, बैतड़ी, डडेलधुरा, डोटी, कैलाली और कंचनपुर जिले के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है। एनडीआरआरएमए ने मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए नदी किनारे और अन्य संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरी एहतियाती उपाय करने की अपील की है।
अधिकारियों ने बताया कि कोशी, नारायणी, बागमती, कर्णाली, महाकाली और उनकी सहायक नदियों के अलावा कंकाई, कमला, बबई, पूर्वी राप्ती और पश्चिमी राप्ती नदियों के जलस्तर पर भी करीबी नजर रखी जा रही है। नेपाल सरकार ने खोज और बचाव अभियानों के लिए 21,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। वहीं, फंसे हुए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर लगातार उड़ान भर रहे हैं।
वाहनों के आवागमन योग्य 19 पुल और कई राजमार्ग तथा प्रमुख सड़कें बाढ़ में बह गई हैं। इनमें से एक नेपाल का चीन के साथ मुख्य जमीनी व्यापार मार्ग था। इसके अलावा, दोनों देशों को जोड़ने वाला रसुवागढ़ी सीमा पार मार्ग भी बाढ़ से प्रभावित हुआ है।
मध्य नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद यातायात का दबाव बढ़ गया है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने काठमांडू को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले पृथ्वी और त्रिभुवन राजमार्गों पर एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू कर दी है। नयी यातायात व्यवस्था के तहत अधिकतम 14 सीटों की क्षमता वाले, काठमांडू से हेटौडा जाने वाले वाहनों को फारपिंग-फाखेल-कुलेखानी-भीमफेदी मार्ग का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है।
वहीं, हेटौडा से काठमांडू जाने वाले वाहनों को भीमफेदी-कुलेखानी-सिस्नेरी-दक्षिणकाली मार्ग से जाने के लिए कहा गया है। हेटौडा से काठमांडू जाने वाले 10 पहियों तक के बड़े मालवाहक और यात्री वाहनों को त्रिभुवन राजमार्ग का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है, जबकि हेटौडा लौटने वाले ऐसे वाहनों को कांती राजमार्ग से जाने का निर्देश दिया गया है। यह एकतरफा यातायात व्यवस्था धादिंग जिले के कृष्णभीर में बाढ़ के कारण राजमार्ग के कुछ हिस्सों के बह जाने के बाद लागू की गई है।
इससे इस मार्ग पर यातायात व्यवस्था बाधित हो गई थी।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.