नेपाल में आई आपदा के बाद राहत और बचाव का काम जारी है। नेपाल सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 580 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी है, जबकि 1000 ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। अभी मौत का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि नेपाल की आर्मी और पुलिस ने बड़े पैमाने पर चल रहे रिलीफ एंड रेस्क्यू ऑपरेशन को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है। ऐसे इसलिए क्योंकि रसुवा और नुवाकोट जिले में फिर से खतरा मंडरा रहा है। तिब्बत के जिस इलाके में ग्लेशियर टूटने से नेपाल में तबाही आई थी, उसी के पास अब एक और झील बन रही है। 2 दिन पहले गिरोंग में जो झील फटी थी, उसके मलबे से दोभान इलाके में भी नदी का रास्ता रुक गया है। ये झील छोचेन और पुरेपु सांगपो नदी के संगम के पास बनी है। यहां झील बनने से पानी का लेवल बढ़ रहा है। नदी के रास्ते में हजारों टन मलबा आ गया है, जिससे पानी ब्लॉक हो गया और आर्टिफिशियल झील बनने लगी है।
चीन में फिर आया भूकंप
दोभान में छोचेन और पुरेपु सांगपो नदी के संगम पर जो झील बन रही है, अगर उसकी Exact लोकेशन की बात करें तो वो गिरोंग से 6 किलोमीटर दूर है और नीचे की साइड पर है। डाउन स्ट्रीम की तरफ पानी का जो नैचुरल फ्लो होता है, वहीं पर मलबे की वजह से ये आर्टिफिशियल लेक बनी है। खतरा इसलिए भी बढ़ रहा है, क्योंकि चीन में शुक्रवार को फिर भूकंप आया। रिक्टर स्केल पर आज भूकंप की तीव्रता 5.1 मापी गई, जबकि 26 अगस्त को 5.2 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप को लेकर हिमालयन रीजन पहले से ही सेंसटिव जोन में है। जिस तरह भूकंप आ रहा है, उसे देखते हुए दोभान में बनी इस आर्टिफिशियल लेक के टूटने की आशंका बढ़ती जा रही है। इसी को देखते हुए नेपाल ने लार्ज स्केल पर चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ हद तक स्थगित कर लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजना शुरू कर दिया है।
कई गांव खाली कराए गए
नेपाल आर्मी के प्रवक्ता कह रहे हैं कि फिलहाल वॉटर लेवल खतरे के स्तर तक नहीं पहुंचा है, लेकिन 26 अगस्त की तबाही से सबक लेकर प्रशासन ने एहतियाती उठाते हुए भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के पास के कई गांव खाली करा दिए हैं। लोगों को तुरंत सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा गया है। इस बीच चीन ने भी तिब्बत में राहत और बचाव अभियान रोक कर लेवल-4 अलर्ट जारी किया है। चीन और नेपाल सरकार फ्लड सिचुएशन को लेकर लगातार सहयोग बनाए हुए है। नेपाल की सेना लाउडस्पीकर के जरिए अनाउंसमेंट करके लोगों से घर खाली करने को कह रही है। एक बार नुकसान झेल चुके लोग भी किसी तरह का रिस्क उठाए बगैर चुपचाप घर खाली कर रहे हैं।
300 से ज्यादा भारतीय लापता
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा में 300 से ज्यादा भारतीय भी लापता हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या तो कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों की है। इसके अलावा नेपाल के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले इंडियन लेबर्स के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। चूंकि नेपाल की सीमा बिहार से लगती है। इसलिए बिहार के भी काफी लोग यहां मजदूरी करते हैं। इंडिया टीवी संवाददाता मनीष प्रसाद को यहां एक ऐसे ही शख्स मिले, जो अपने रिश्तेदार की तलाश कर रहे थे। मनीष से बात करते-करते उनकी आंखों में आंसू आ गए। मोतिहारी के रहने वाले सुकुल सहनी ने बताया कि तीन दिन से वो भटक रहे हैं, लेकिन कोई उनकी मदद नहीं कर रहा, सही जानकारी नहीं दे रहा। आपको बता दें कि तबाही इतने बड़े पैमाने पर हुई है कि रिलीफ एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी समय लग सकता है। पहाड़ी इलाकों में राहत अभियान चलाना वैसे भी मुश्किल होता है।
त्रिशूली में सबसे ज्यादा नुकसान
नेपाल में बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान त्रिशूली में ही हुआ है। मरने वालों का आंकड़ा भी सबसे ज्यादा यहीं है। इसीलिए सरकार ने सेना को त्रिशूली में रिलीफ एंड रेस्क्यू ऑपरेशन पर फोकस करने को कहा है। आर्मी ने यहां अपना बेस सेंटर स्थापित किया है। लोगों को रेस्क्यू कर इस बेस सेंटर में लाया जा रहा है और उनके खाने-पीने का इंतजाम किया जा रहा है। लोग भी बड़ी संख्या में यहां आ रहे हैं, जिससे उन्हें अपने लापता परिजनों के बारे में पता चल सके।
टनल में फंसे मजदूर
नेपाल में आए इस बाढ़ से रसुआ हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को भी काफी नुकसान हुआ है। 111 मेगावट के इस पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 70 से ज्यादा लोग लापता हैं। और जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है, उनके बचने की उम्मीद भी कम होती जा रही है। बाढ़ के साथ आए मलबे की वजह से इस पावर प्रोजेक्ट के पास बनी टनल में भी कुछ मजदूर फंस गए थे। मलबे की वजह से सुरंग का मुहाना बंद हो गया। बाद में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान टनल के गेट से मलबा हटाकर इन मजदूरों को बाहर निकाला गया। इनके अलावा भी कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने मौत को उस दिन बहुत करीब से देखा। वो तो बच गए, लेकिन उनके कई जानने वाले अभी लापता हैं।

नेपाल ने विदेशी मदद लेने से किया इनकार
बाढ़ से हुए भारी नुकसान के बीच नेपाल सरकार ने एक चौंकाने वाला फैसला किया। नेपाल ने विदेशी मदद लेने से इनकार कर दिया है। बालेन शाह सरकार ने कहा कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां रिलीफ एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में सक्षम हैं। आपदा में लापता हुए सैकड़ों विदेशी नागरिकों के बारे में जानकारी के लिए उसने एक सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाया है। जिसे भी जानकारी चाहिए, वो इस कंट्रोल रूम में कॉन्टैक्ट कर सकता है। नेपाल सरकार के मुताबिक विदेशी मदद ना लेने का फैसला 2015 में आए भूकंप से मिले सबक के बाद लिया गया। 2015 में नेपाल में विनाशकारी भूकंप आया था। जब कई देशों ने रिलीफ एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए अपनी टीमें नेपाल भेजीं, लेकिन उनके बीच co-ordination नहीं बन पाया। सरकार का कहना है कि लोकल और विदेशी राहत टीमों के बीच इस काम के लिए रेस होती है, जबकि आपदा के समय एयरपोर्ट, रोड और कम्युनिकेशन नेटवर्क पहले से ही दबाव में होते हैं। इसी से सबक लेते हुए नेपाल ने इस बार विदेशी मदद नहीं लेने का फैसला किया है।
भारत ने भेजी मदद
हालांकि, नेपाल सरकार के इस फैसले से पहले ही भारत करीब पचास टन राहत सामग्री भेज चुका है। भारत की कोशिश है कि वो जल्द से जल्द अपने लापता नागरिकों की तलाश कर सके। 300 भारतीय अभी तक लापता बताए जा रहे हैं। सरकार लगातार नेपाल के कॉन्टैक्ट में है। आज फॉरेन मिनिस्टर एस जयशंकर ने दिल्ली एयरपोर्ट पर कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे भारतीयों से मुलाकात की। जयशंकर ने कहा कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के लोग लगातार प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीयों को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर कह रहे थे कि करीब 300 भारतीय लापता हैं और सरकार का फोकस इसी बात पर है कि जल्द से जल्द इनसे कॉन्टैक्ट स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि अभी तक 80 भारतीयों को रेस्क्यू किया जा चुका है। जयशंकर ने भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए नेपाल की सेना को भी शुक्रिया कहा है।
ये भी पढ़ें- नेपाल सरकार ने दी बड़ी जानकारी, तत्काल बड़े खतरे की आशंका नहीं, शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन
तिब्बत-नेपाल सीमा पर फिर ताल फूटा, चीन ने रेस्क्यू ऑपरेशन रोका, सभी को 1KM दूर जाने की सलाह
function loadFacebookScript(){
!function (f, b, e, v, n, t, s) {
if (f.fbq)
return;
n = f.fbq = function () {
n.callMethod ? n.callMethod.apply(n, arguments) : n.queue.push(arguments);
};
if (!f._fbq)
f._fbq = n;
n.push = n;
n.loaded = !0;
n.version = ‘2.0’;
n.queue = [];
t = b.createElement(e);
t.async = !0;
t.src = v;
s = b.getElementsByTagName(e)[0];
s.parentNode.insertBefore(t, s);
}(window, document, ‘script’, ‘//connect.facebook.net/en_US/fbevents.js’);
fbq(‘init’, ‘1684841475119151’);
fbq(‘track’, “PageView”);
}
window.addEventListener(‘load’, (event) => {
setTimeout(function(){
loadFacebookScript();
}, 7000);
});
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.