मेडिकल के क्षेत्र में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक NEET PG 2026 के परिणाम घोषित हो चुके हैं. इस बार की परीक्षा में डॉ. मोनीश कन्ना आर ने पूरे देश में पहला स्थान AIR 1 हासिल कर इतिहास रच दिया है. उन्होंने 720 अंकों में से 641 अंक हासिल कर यह शानदार मुकाम पाया है. अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद एक इंटरव्यू में डॉ. मोनीश ने अपनी पढ़ाई के अनूठे तरीकों, तैयारी के दौरान आने वाली मानसिक दिक्कतों और अपने माता-पिता के सहयोग को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा की हैं.
डॉ. मोनीश कन्ना की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनकी निरंतर प्रैक्टिस रही है. अपनी तैयारी के दौरान उन्होंने कुल 10,425 MCQs को हल किया. इसके अलावा उन्होंने 445 ऑनलाइन लीडरबोर्ड्स में हिस्सा लिया, जिसमें से 85 बार उन्होंने रैंक 1 हासिल की.
हर दिन सॉल्व करते थे 100 प्रश्न
खुद को थोड़ा धीमा सीखने वाला बताते हुए डॉ. मोनीश ने कहा कि वे क्लास खत्म होने के तुरंत बाद टेस्ट नहीं देते थे, बल्कि वे पूरे दिन की सामग्री का अच्छी तरह से अध्ययन करते थे और अगली सुबह लीडरबोर्ड में शामिल होते थे. वे हर दिन लगभग 100 प्रश्न हल करते थे और गलत होने वाले सवालों के लिए एक अलग मिस्टेक नोटबुक बनाते थे, ताकि मुख्य परीक्षा से पहले अपनी कमजोरियों को सुधारा जा सके.
वर्कबुक का 4 से 5 बार रिवीजन
NEET PG के विशाल सिलेबस को कवर करने के लिए डॉ. मोनीश ने एक बेहद सुनियोजित रिवीजन शेड्यूल तैयार किया था. उन्होंने मुख्य परीक्षा में बैठने से पहले अपनी सभी वर्कबुक का 4 से 5 बार पूरी तरह से रिवीजन किया था. हर बार रिवीजन करते समय वे अपने कमजोर विषयों को बुकमार्क या चिह्नित कर लेते थे और अगली बार उन विषयों को प्राथमिकता देते थे.
उन्होंने यह भी बताया कि तैयारी के शुरुआती दिनों में तेजी से पन्ने पलटने की वजह से वे चीजों को सही से समझ नहीं पा रहे थे, जिसके बाद उन्होंने रफ्तार के बजाय कांसेप्ट को गहराई से समझने पर ध्यान केंद्रित किया और परीक्षा के करीब आने पर टाइम-बाउंड रीडिंग शुरू की.
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निराशा और बर्नआउट का दौर
लगातार पढ़ाई करने की वजह से डॉ. मोनीश के सफर में एक ऐसा दौर भी आया जब एक टेस्ट में खराब प्रदर्शन के कारण वे मानसिक रूप से बेहद थक गए थे और लगभग तीन से चार हफ्तों तक वे बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं कर पाए. इस गंभीर बर्नआउट की स्थिति से बाहर निकलने के लिए उन्होंने जबरदस्ती पढ़ाई करने के बजाय एक लाइब्रेरी ज्वाइन की ताकि उन्हें नया माहौल मिल सके.
इसके साथ ही उन्होंने अपनी मानसिक रिकवरी के लिए ध्यान लगाना शुरू किया, पर्याप्त नींद ली और रोजाना टहलना व जॉगिंग करना शुरू किया. उनके माता-पिता ने भी इस मुश्किल घड़ी में उनका हौसला बढ़ाया जिससे वे एक बार फिर से अपनी पूरी ऊर्जा के साथ पढ़ाई के मैदान में लौट सके.
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