NEET PG 2026: नीट पीजी परीक्षा में शामिल होने वाले मेडिकल छात्रों के लिए मार्किंग स्कीम और टाई-ब्रेकिंग नियम जानना बेहद जरूरी है। जानिए कैसे तय होती है आपकी रैंक और नेगेटिव मार्किंग का क्या पड़ता है असर।
नीट पीजी परीक्षा का पैटर्न और मार्किंग स्कीम
नीट पीजी की परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में कुल 200 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) पूछे जाते हैं, जिन्हें हल करने के लिए अभ्यर्थियों को 3 घंटे 30 मिनट का समय दिया जाता है। पूरी परीक्षा कुल 800 अंकों की होती है।
बोर्ड की ओर से तय मार्किंग स्कीम इस प्रकार है:
सही उत्तर पर अंक: प्रत्येक सही उत्तर देने पर अभ्यर्थी को 4 अंक (+4) दिए जाते हैं।
गलत उत्तर पर पेनल्टी: परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है। यदि आप किसी प्रश्न का गलत उत्तर देते हैं, तो 1 अंक (-1) काट लिया जाएगा।
छोड़े गए प्रश्न: जिन प्रश्नों का उत्तर अभ्यर्थी नहीं देते हैं या जिन्हें वे छोड़ देते हैं, उनके लिए शून्य (0) अंक दिया जाता है। यानी बिना उत्तर दिए प्रश्नों पर कोई अंक नहीं कटता।
इसी आधार पर छात्र का कुल प्राप्तांक तैयार किया जाता है।
जब दो अभ्यर्थियों के अंक हों बराबर: जानें टाई-ब्रेकिंग नियम
कई बार नीट पीजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में दो या दो से अधिक अभ्यर्थियों के कुल मार्क्स बिल्कुल एक समान हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में उनकी मेरिट रैंक तय करने के लिए NBEMS विशेष टाई-ब्रेकिंग नियमों का पालन करता है।
कम गलत उत्तर देने वाले को प्राथमिकता: यदि दो छात्रों के कुल अंक समान हैं, तो जिस अभ्यर्थी ने पूरी परीक्षा में कम संख्या में गलत उत्तर दिए होंगे, उसे बेहतर और उच्च रैंक दी जाएगी।
सब्जेक्ट-वाइज प्रदर्शन: अगर गलत उत्तरों की संख्या भी बराबर निकलती है, तो परीक्षा के सेक्शन-ए, सेक्शन-बी और सेक्शन-सी में छात्रों के व्यक्तिगत प्राप्तांकों की तुलना की जाती है। जिस छात्र के मुख्य सेक्शनों में अधिक अंक होंगे, उसे प्राथमिकता मिलेगी।
अधिक उम्र वाले को प्राथमिकता: यदि सभी पैमानों पर भी मुकाबला टाई रहता है, तो अधिक आयु वाले अभ्यर्थी को उम्र के आधार पर उच्च मेरिट रैंक प्रदान की जाएगी।
MBBS के अंक: अंतिम विकल्प के रूप में अभ्यर्थी के पूरी एमबीबीएस डिग्री के दौरान प्राप्त कुल प्रतिशत अंकों के आधार पर रैंक तय की जाती है।
नीट पीजी की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे तुक्के लगाने से बचें, क्योंकि नेगेटिव मार्किंग आपकी ओवरऑल रैंक को नीचे गिरा सकती है। सही रणनीति और सटीक उत्तर ही आपको मनपसंद मेडिकल कॉलेज में सीट दिला सकते हैं।
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