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वैश्विक पूर्वानुमान प्रणाली (जीएफएस) भारतीय मौसम विज्ञान एवं चिकित्सा विभाग (आईएमडी) द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक शक्तिशाली कंप्यूटर मॉडल है। यह मौसम पूर्वानुमान मॉडल कई दिनों पहले मौसम के पैटर्न का पूर्वानुमान लगाने के लिए विशाल मात्रा में वायुमंडलीय डेटा का विश्लेषण करता है। इसके हालिया पूर्वानुमानों के अनुसार, पश्चिम से आने वाली नमीयुक्त हवाओं को लाने वाली पश्चिमी विक्षोभ प्रणाली को दक्षिणी भारत में ऊपरी स्तर की प्रमुख पूर्वी हवाओं के ठीक से मजबूत होने से पहले ही आगे बढ़ना होगा। तब तक, केरल में मानसून की प्रारंभिक धारा मंद रहने की संभावना है।
इस साल मानसून अनिश्चित रहा है, जिसके चलते अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का पूर्वानुमान कई बार गलत साबित हुआ है। आईएमडी ने पहले केरल में मानसून के आगमन का अनुमान 26 मई के आसपास लगाया था। लेकिन अब यह समय बदल गया है और वर्तमान अनुमानों के अनुसार मानसून का आधिकारिक आगमन 2-4 जून के बीच होने की संभावना है। केरल के कुछ हिस्सों में मानसून से पहले की बारिश हो चुकी है, लेकिन मानसून के आगमन की घोषणा के लिए आवश्यक सभी परिस्थितियाँ अभी भी बन रही हैं। आईएमडी द्वारा मानसून के आगमन की घोषणा के लिए तीन शर्तों का एक साथ पूरा होना आवश्यक है।
इन तीन शर्तों में केरल के कम से कम 60% नामित मौसम स्टेशनों पर लगातार वर्षा, अरब सागर पर एक निश्चित गति की पश्चिमी हवाएं और पर्याप्त बादल छाए रहना शामिल हैं। फिलहाल बारिश और बादलों का आवरण तो पर्याप्त है, लेकिन केरल में पश्चिमी हवाएँ कमज़ोर पड़ रही हैं। हवाओं के कमज़ोर पड़ने का कारण बंगाल की खाड़ी में हुई चक्रवाती गतिविधि है, जिससे मानसूनी हवाओं का प्रवाह कमज़ोर हो गया है।
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