किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक से आई यह तस्वीर इस वक्त खूब चर्चा में हैं। एसईओ समिट के दौरान पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिमपिंग आमने-सामने थे। दोनों नेताओं ने एक दूसरे का अभिवादन किया और हाथ मिलाया। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ सालों से तनाव के दौर से गुजरे। ऐसे में एसइओ के मंच पर मोदी और जिनपिंग की मुलाकात को अहम माना जा रहा है। आपको बता दें पीएम मोदी कल ही बिश्केक पहुंचे थे। आज वह एसइओ के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे। समिट की शुरुआत से पहले संगठन के सदस्य देशों के नेता ग्रुप फोटो के लिए एक साथ जुटे। इस दौरान पीएम मोदी की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन समेत कई नेताओं से हुई।
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पीएम मोदी ने नेताओं का अभिवादन किया और हाथ मिलाया। लेकिन जिनपिंग से उनकी एक छोटी सी मुलाकात सिर्फ हाथ मिलाना ही अपने आप में चर्चा का विषय बन गया। हालांकि इस दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मंच पर मौजूद थे। लेकिन पीएम मोदी ने शहबाज शरीफ की तरफ देखा तक नहीं। आपको बता दें बिकेक में प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक व्यस्तता एक दिन पहले शुरू हो गई थी। कल उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के साथ एक बैठक की। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में रूस यूक्रेन युद्ध का मुद्दा प्रमुख रहा। पीएम मोदी ने युद्ध को जल्द खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया और शांति के प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही। भारत का लगातार यही रुख रहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए। पुतिन के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। व्यापार और निवेश को बढ़ाने, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और सुरक्षा जैसे मुद्दे बातचीत में शामिल रहे। यानी बिश्केक में पीएम मोदी की बैठकों में वैश्विक संकट के साथ-साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक हित भी अहम रहे। अब बात एसइओ की करें तो शघाई सहयोग संगठन की स्थापना साल 2001 में हुई थी। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किरगिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर इसकी शुरुआत की थी।
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भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद ईरान 2023 और बेलारूस 2024 में संगठन में शामिल हुआ। फिलहाल एसइओ में कुल 10 सदस्य देश हैं। एसईओ का मकसद सदस्य देशों के बीच आपसी भरोसा और सहयोग बढ़ाना, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को मजबूत करना और सुरक्षा, आर्थिक विकास, व्यापार और दूसरे क्षेत्रों में मिलकर काम करना है। संगठन के मंच पर सदस्य देश साझा चुनौतियों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत करते हैं।
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बिश्केक में हो रही इस बैठक की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि एक ही मंच पर भारत, चीन, रूस और पाकिस्तान जैसे देश मौजूद हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई बड़े संघर्षों और भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है। एसईओ की बैठक बातचीत और कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन जाती है। अब प्रधानमंत्री मोदी का जिमपिंग के साथ छोटा सा अभिवादन और पुतिन के साथ बैठक को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। एक तरफ चीन के साथ रिश्तों में पुराना तनाव, दूसरी तरफ रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत लगातार शांति और बातचीत की पैरवी कर रहा है।
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