Mirzapur The Movie Review: मुन्ना भैया और गुड्डू पंडित की वापसी में कितना दम है ये जानने के लिए आपको रिव्यू पढ़ना होगा। बता दें, ये फिल्म 3 घंटे 15 मिनट की है।
किरदार: पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु, जितेंद्र कुमार
नए किरदार: रवि किशन, मोहित मलिक
फर्स्ट हाफ में धीमी कहानी और बेतुका गाना
फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी है और कहानी को रफ्तार पकड़ने में समय लगता है। यही वजह है कि पहला हाफ कई जगहों पर बोरिंग महसूस होता है। कहानी आगे बढ़ रही होती है, लेकिन स्क्रीन पर वैसा रोमांच पैदा नहीं होता, जिसकी ‘मिर्जापुर’ से उम्मीद की जाती है।
इस बीच फिल्म में एक रोमांटिक गाना आता है, जो सबसे ज्यादा निराश करता है। यह गाना कहानी के फ्लो को पूरी तरह तोड़ देता है और ऐसा लगता है कि इसे जबरदस्ती फिल्म में ठूंसा गया है। ‘मिर्जापुर’ जैसी क्राइम-थ्रिलर फिल्म में यह गाना कहानी के माहौल के साथ बिल्कुल फिट नहीं बैठता। हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म में नए किरदारों की एंट्री होती है और यहीं से कहानी में थोड़ी जान आती है।
रवि किशन और मोहित मलिक ने बढ़ाया ‘वॉओ फैक्टर’
रवि किशन की एंट्री फिल्म को एक अलग ऊर्जा देती है। पर्दे पर उनकी मौजूदगी दमदार है और वह अपने किरदार में पूरी तरह जमे हुए नजर आते हैं।
वहीं मोहित मलिक का किरदार फिल्म के सबसे रहस्यमयी पहलुओं में से एक है। शुरुआत में ऐसा लगता है कि कहानी में रवि किशन का किरदार सबसे ज्यादा अहम होने वाला है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म क्लाइमैक्स की ओर बढ़ती है, तस्वीर बदलने लगती है। आखिर तक पहुंचते-पहुंचते समझ आता है कि असली बाजी तो मोहित मलिक के किरदार के हाथ में है।
जितेंद्र ने निभाया बबलू पंडित का किरदार
सीरीज में बबलू पंडित का किरदार विक्रांत मैसी ने निभाया था, जबकि फिल्म में यह जिम्मेदारी जितेंद्र कुमार के कंधों पर है। जितेंद्र ने इस किरदार को निभाने में अपना पूरा जोर लगाया है और उनकी कोशिश साफ नजर आती है कि दर्शकों को विक्रांत मैसी की कमी महसूस न हो।
हालांकि, इसके बावजूद विक्रांत मैसी और अली फजल की पुरानी केमिस्ट्री की याद आती है। बबलू पंडित के किरदार के साथ दर्शकों का जो भावनात्मक जुड़ाव सीरीज में बना था, उसे दोबारा उसी स्तर पर महसूस कर पाना थोड़ा मुश्किल है।
कहानी की टाइमलाइन बनी फिल्म की सबसे बड़ी उलझन
फिल्म की कहानी सीरीज के पहले सीजन के बाद के दौर की है। यहां फिल्म की टाइमलाइन सबसे बड़ी परेशानी बनकर सामने आती है। चूंकि दर्शक ‘मिर्जापुर’ सीरीज के जरिए आगे की कहानी पहले ही देख चुके हैं, इसलिए प्रीक्वल के तौर पर दिखाई जा रही इस कहानी में कई जगहों पर उत्सुकता कम हो जाती है।
दर्शकों को पहले से पता है कि आगे क्या होने वाला है। ऐसे में पीछे की कहानी में बड़े ट्विस्ट और सरप्राइज भी उतना असर नहीं छोड़ पाते। यही वजह है कि कई जगहों पर फिल्म बेअसर और खिंची हुई महसूस होती है।
मुन्ना भैया और गुड्डू पंडित आते हैं तो बढ़ जाता है मजा
लेकिन फिल्म में कुछ ऐसे पल भी हैं, जिनके लिए ‘मिर्जापुर’ के फैंस सिनेमाघर तक जरूर जाना चाहेंगे। जब-जब मुन्ना भैया और गुड्डू पंडित पर्दे पर आते हैं, फिल्म का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। दोनों की केमिस्ट्री और एक्टिंग हमेशा की तरह शानदार है। इन दोनों को बड़े पर्दे पर देखना फैंस के लिए निश्चित तौर पर ट्रीट है।
सेकंड हाफ में आती है फिल्म की असली रफ्तार
फर्स्ट हाफ की तुलना में फिल्म का सेकंड हाफ काफी बेहतर है। कहानी रफ्तार पकड़ती है और कई ऐसे ट्विस्ट और टर्न आते हैं, जो सीधे आपकी धड़कनें बढ़ा देते हैं।
यहीं पर फिल्म आपको स्क्रीन से बांधने में कामयाब होती है। क्लाइमैक्स की तरफ बढ़ते हुए कहानी में जिस तरह के मोड़ आते हैं, वे पहले हाफ की सुस्ती की भरपाई कुछ हद तक कर देते हैं।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी इसकी ताकत है। म्यूजिक काफी दमदार और लाउड है, जो खासकर थ्रिल और एक्शन वाले सीन्स के असर को बढ़ाता है। कई मौकों पर बैकग्राउंड म्यूजिक ही सीन में एक्साइटमेंट पैदा करता है।
3 घंटे 15 मिनट की लंबाई बनी सबसे बड़ी कमजोरी
अब बात उस चीज की, जो फिल्म का सबसे बड़ा माइनस है—इसकी लंबाई। ‘मिर्जापुर द मूवी’ करीब 3 घंटे 15 मिनट लंबी है और कई जगहों पर आपको महसूस होता है कि कहानी को थोड़ा छोटा किया जा सकता था। खासकर पहले हाफ में कुछ सीन्स और गाने की वजह से फिल्म जरूरत से ज्यादा लंबी लगती है।
दर्शक कई बार घड़ी देखने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिर फिल्म खत्म कब होगी। अगर इसकी लंबाई थोड़ी कम होती और कहानी को ज्यादा टाइट रखा जाता, तो फिल्म का प्रभाव कहीं ज्यादा बेहतर हो सकता था।
देखें या नहीं?
कुल मिलाकर, ‘मिर्जापुर द मूवी’ में एक्टिंग, दमदार बैकग्राउंड म्यूजिक और मुन्ना भैया-गुड्डू पंडित जैसे पसंदीदा किरदारों की मौजूदगी इसकी सबसे बड़ी ताकत है। रवि किशन और मोहित मलिक भी फिल्म में नया रंग जोड़ते हैं।
वहीं धीमा और कमजोर फर्स्ट हाफ, जबरदस्ती डाला गया रोमांटिक गाना, प्रीक्वल की टाइमलाइन और 3 घंटे 15 मिनट की लंबाई फिल्म को थोड़ा थकाऊ बना देती है।
अगर आप ‘मिर्जापुर’ के पक्के फैन हैं और इसके किरदारों को बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे थे, तो इसे एक बार जरूर देख सकते हैं। लेकिन अगर आप सीरीज के फैन नहीं हैं या छोटी और तेज रफ्तार फिल्में पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपको लंबी और थोड़ी खिंची हुई लग सकती है।
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