ढाका के गलियारों में चर्चा तेज है कि एक फोन कॉल ने तख्तापलट के बाद बनी नई व्यवस्था की नींव हिला दी है। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन पर इस्तीफे का दबाव बन रहा है और खबर आ रही है कि वह अब कभी भी कुर्सी छोड़ सकते हैं। यह पूरा मामला शुरू होता है बांग्लादेशी राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन की लंदन यात्रा से। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने लंदन दौरे के दौरान शेख हसीना से संपर्क करने की कोशिश की। बल्कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दोनों के बीच फोन पर बातचीत होने का भी दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की अब तक आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दरअसल बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलोक की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति मोहम्मद शबुद्दीन ने अपने लंदन दौरे के दौरान भारत में रह रही शेख हसीना से कथित तौर पर फोन पर बातचीत की थी।
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जैसे ही यह खबर सामने आई बांग्लादेश की राजनीति में सवाल उठने लगे कि क्या राष्ट्रपति अपने संवैधानिक निष्पक्षता बनाए हुए हैं या नहीं? सबसे कड़ी प्रतिक्रिया बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी की ओर से आई। पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति शहबुद्दीन के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीएपी का मानना है कि अगर राष्ट्रपति ने वास्तव में निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री से संपर्क किया है तो यह राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मामला है। यही नहीं कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन अपना कार्यकाल पूरा होने से करीब 2 साल पहले ही स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि राष्ट्रपति भवन की ओर से ना तो इन खबरों की पुष्टि की गई है और ना ही इनका खंडन किया गया है। जब बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाउद्दीन अहमद से इसकथित फोन कॉल के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने भी साफ जवाब देने से बचा और कहा कि इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इतना जरूर कहा कि अगर राष्ट्रपति स्वास्थ्य या किसी अन्य कारण से इस्तीफा देना चाहते हैं तो संविधान उन्हें उसकी इजाजत देता है।
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राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को अप्रैल 2023 में 5 सालों के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था और उनकी नियुक्ति उस समय हुई थी जब शेख हसीना प्रधानमंत्री थे। अगस्त 2024 में छात्रा आंदोलन के बाद तख्तापलट हुआ और शेख हसीना को देश छोड़कर भारत आना पड़ा। तब से वह भारत में ही रह रही हैं। अब उन्होंने दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने की घोषणा की है। जिससे देश की राजनीति फिर एक बार गर्म हो चुकी है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि अगर राष्ट्रपति शबुद्दीन इस्तीफा देते हैं तो बांग्लादेश के संविधान के अनुसार संसद के स्पीकर अंतरिम राष्ट्रपति का कार्यभार संभालेंगे। जब तक कि नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि शेख हसीना और राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन के बीच कथित फोन कॉल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस खबर को अभी दावे और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर ही देखा जा रहा है। लेकिन इतना जरूर तय है कि शेख हसीना की संभावित वापसी से पहले बांग्लादेश की राजनीति में उठा यह नया हलचल आने वाले दिनों में कोई बड़ा घटनाक्रम बन सकता है।
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