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- Maruti Suzuki India Car Price Hike | New Rates From June 2026 Due To Rising Input Cost
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देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी की ओर से बढ़ाई गई ये नई कीमतें जून 2026 से प्रभावी होंगी। लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत के कारण कंपनी ने यह फैसला किया है।
मारुति के अनुसार, पोर्टफोलियो के सभी मॉडल्स पर कीमतों में यह बढ़ोतरी लागू होगी। हालांकि, किस कार के दाम कितने बढ़ेंगे, यह उसके मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करेगा। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में यह जानकारी दी है।
एरिना-नेक्सा के सभी मॉडल्स के प्राइस बढ़ेंगे
कंपनी अपने वाहनों की बिक्री दो अलग-अलग डीलरशिप चैनल्स के जरिए करती है, जिनमें एरिना और नेक्सा शामिल हैं। जून से इन दोनों ही चैनल्स से बिकने वाली कारें महंगी हो जाएंगी।
- एरिना मॉडल्स: इसके तहत आने वाली ऑल्टो K10, एस-प्रेसो, सेलेरियो, वैगनआर, ईको, स्विफ्ट, डिजायर, अर्टिगा, ब्रेजा और विक्टोरिस की कीमतों में बदलाव होगा।
- नेक्सा मॉडल्स: प्रीमियम चैनल नेक्सा के तहत बिकने वाली बलेनो, फ्रॉन्क्स, ग्रैंड विटारा, जिम्नी, XL6, इन्विक्टो और हाल ही में लॉन्च की गई इलेक्ट्रिक कार- ई विटारा के दाम भी बढ़ जाएंगे।
कंपनी के लागत कम करने के प्रयास विफल
- ब्रेजा बनाने वाली इस कंपनी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से लागत के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे।
- कंपनी ने इसके लिए कई कॉस्ट रिडक्शन (लागत कटौती) उपाय भी अपनाए, ताकि ग्राहकों पर इसका बोझ न पड़े।
- हालांकि, बाजार में महंगाई का दबाव काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है और प्रतिकूल लागत माहौल लगातार बना हुआ है।
ग्राहकों पर कम से कम असर डालने की कोशिश
कंपनी ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के कारण बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा बाजार पर डालना अब जरूरी हो गया था।
इसके बावजूद कंपनी ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि इस प्राइस हाइक का आम ग्राहकों पर कम से कम असर पड़े।
1 साल से ज्यादा समय बाद बढ़ रहे हैं दाम
मारुति सुजुकी ने इससे पहले आखिरी बार अप्रैल 2025 में अपनी कारों की कीमतें बढ़ाई थीं। उस समय कंपनी ने अलग-अलग मॉडल्स के दाम में ₹62,000 तक की बढ़ोतरी की थी।
अब करीब 1 साल से भी ज्यादा समय के अंतराल के बाद कंपनी ने दोबारा कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। इस बीच मास-मार्केट और लग्जरी सेगमेंट की कई अन्य कार कंपनियां जनवरी 2026 में ही अपने वाहनों के दाम बढ़ा चुकी हैं।
रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है?
- रेगुलेटरी फाइलिंग: शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अपने किसी भी बड़े बिजनेस फैसले, मुनाफे, नुकसान या कीमतों में बदलाव की जानकारी ‘सेबी’ या स्टॉक एक्सचेंज को दें। इसी आधिकारिक दस्तावेज को रेगुलेटरी फाइलिंग कहते हैं।
- इनपुट कॉस्ट: किसी भी कार को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, प्लास्टिक, एल्युमिनियम, रबर और इलेक्ट्रॉनिक्स) की कुल लागत को इनपुट कॉस्ट कहा जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी बढ़ जाती है।
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