कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अंतरिम राहत देते हुए उसके फ्रीज़ किए गए तीन बैंक खातों को अस्थायी रूप से चलाने की इजाज़त दे दी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने जिन सबूतों के आधार पर खातों को फ्रीज़ किया था, वे जांच के इस चरण में ठोस नहीं लगे। हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि इन अकाउंट्स का इस्तेमाल सिर्फ़ पार्टी के रोज़मर्रा के खर्चों के लिए ही किया जा सकता है। अपने निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए, हाई कोर्ट ने सभी लेन-देन की निगरानी के लिए एक स्पेशल ऑफ़िसर नियुक्त किया। यह अंतरिम व्यवस्था 30 सितंबर तक लागू रहेगी।
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लेन-देन की निगरानी के लिए रिटायर्ड HC जज नियुक्त
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुब्रत तालुकदार को अकाउंट्स के कामकाज की देखरेख के लिए स्पेशल ऑफ़िसर नियुक्त किया। कोर्ट ने उस जल्दबाज़ी पर भी सवाल उठाए जिसके साथ पुलिस ने FIR दर्ज होने के तुरंत बाद अकाउंट्स फ़्रीज़ कर दिए थे। बेंच ने पूछा अकाउंट्स फ़्रीज़ करने में इतनी जल्दबाज़ी क्यों की गई?” बेंच ने ध्यान दिलाया कि FIR 18 जून को दर्ज की गई थी और अगले ही दिन अकाउंट्स फ़्रीज़ कर दिए गए। शुरुआती चरण में कोर्ट ने कहा कि उसे ऐसी तत्काल कार्रवाई को सही ठहराने वाला कोई ठोस सबूत या सामग्री नहीं मिली है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आम नागरिक जब शिकायत लेकर पुलिस के पास जाते हैं, तो ऐसी तत्परता शायद ही देखने को मिलती है।
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फंड निकालने पर कड़ी शर्तें
हाई कोर्ट ने अकाउंट्स को चालू रखने की इजाज़त देते हुए कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए। TMC को सिर्फ़ अपने रोज़मर्रा के कामकाज और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों के लिए ही फंड निकालने की इजाज़त होगी। किसी और मकसद के लिए पैसे निकालने की इजाज़त नहीं होगी। बैंक में कोई भी चेक पेश करने से पहले, उस पर TMC के दो अधिकृत पदाधिकारियों के हस्ताक्षर होने चाहिए। इसके अलावा, हर चेक पर स्पेशल ऑफिसर के भी हस्ताक्षर होने चाहिए।
दोनों पक्षों ने अलग-अलग तर्क दिए
‘लाइव लॉ’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, TMC की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि अकाउंट्स फ्रीज़ करने से एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी का कामकाज असल में ठप हो गया है, जो उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। सिंघवी ने कहा कि शिकायत में पार्टी के खिलाफ़ कोई खास आरोप नहीं थे और ज़ोर देकर कहा कि पार्टी का सारा फंड चुनाव आयोग के नियमों और इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक रखा जाता था।
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