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केजरीवाल ने कहा कि पेट्रोल 102 प्रति लीटर के बजाय 82 प्रति लीटर मिलना चाहिए और डीजल की कीमतें भी कम होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाया जाए। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2014 के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कई बार गिरी हैं, लेकिन इसका असर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं दिखा।
उन्होंने पूछा कि 2014 से अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम से कम छह बार घटी हैं, लेकिन देश में पेट्रोल की कीमतें उस हिसाब से कम नहीं की गईं। इन सालों में जो भारी मुनाफा कमाया गया, उसका क्या हुआ? केजरीवाल ने तर्क दिया कि ईंधन की कीमतें कम करने से महंगाई का दबाव कम होगा और परिवारों व व्यवसायों, दोनों पर वित्तीय बोझ भी घटेगा। उन्होंने केंद्र पर यह आरोप भी लगाया कि वह तेल कंपनियों को ईंधन की कीमतें कृत्रिम रूप से ऊंची बनाए रखने की अनुमति दे रहा है, जबकि उन्हें सस्ते कच्चे तेल से होने वाले लाभ का फायदा जनता तक पहुंचाना चाहिए।
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उनके ये बयान केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के उस संकेत के कुछ दिनों बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें चार महीने के निचले स्तर पर आने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत कटौती की संभावना नहीं है। मंत्री के अनुसार, सरकारी रिफाइनर अभी भी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रहे हैं जिसे वेस्ट एशिया में संघर्ष के चरम पर ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था। संघर्ष शुरू होने के दो महीने से भी अधिक समय बाद, मई के दूसरे भाग में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की लागत में हुई वृद्धि से कम थी, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को बोझ का कुछ हिस्सा उठाना पड़ा।
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