आपको बता दें कि, लोक अदालत एक ऐसी जगह है जहां न तो किसी की जीत होती है और न ही किसी की हार, बल्कि दोनों पक्ष सम्मानजनक समझौते के साथ हाथ मिलाते हैं। अब आप बैंक लोन रिकवरी, बिजली बिल विवाद, चेक बाउंस और छोटे-मोटे सिविल मामलों के लिए यह गोल्डन अवसर है, जहां आप बिना किसी कानूनी फीस के अपना बोझ हल्का कर सकते हैं।
नेशनल लोक अदालत में किन मामलों का होगा निपटारा?
– अगर आपने किसी बैंक से लोन लिया है और आप किश्तें नहीं चुका पा रहे हैं, तो आप यहां आकर वन टाइम सेटलमेंट के जरिए अपना खाता बंद करवा सकते हैं।
– बिजली और पानी से जुड़े पुराने बकाया बिलों या चोरी से संबंधित मामलों में भी इस दिन राहत मिल सकती है। ऐसे मामलों में आपसी सहमति से समझौता कर भारी छूट के साथ भुगतान करने का अवसर दिया जाता है। इससे लोगों को अपने पुराने विवाद और बकाया आसानी से निपटाने में मदद मिलती है।
– बिजनेस या व्यक्तिगत लेनदेन में फंसे चेक बाउंस के मामलों को यहां सुलझाया जा सकता है।
– पति पत्नी के बीच के झगड़े (तलाक के छोड़कर बाकी विवाद) और भरण-पोषण के मामले।
– छोटे-मोटे आपराधिक मामलों और ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी किए गए चालानों का निपटारा भी यहां आसानी से किया जा सकता है। ऐसे मामलों में लोग अपने जुर्माने का भुगतान कर मामला जल्दी समाप्त कर सकते हैं।
लोक अदालत में सुलझाए गए मामलों में फायदा मिलता है?
– कोर्ट फीस की वापसी- लोक अदालत का सबसे बड़ा फायदा होता है कि केस पहले से कोर्ट में चल रहा और आप लोक अदालत में समझौता कर लेते हैं, तो आपके द्वारा जमा की गई कोर्ट फीस वापस मिल जाती है।
– तुरंत और अंतिम फैसला- लोक अदालत के फैसले के खिलाफ किसी भी ऊपरी अदालत में अपील नहीं की जा सकती है। इसका सीधा मतलब है कि फैसला अंतिम होगा और केस हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
– किसी वकील की जरुरत नहीं- आपको इसके लिए वकील की जरुरत नहीं होगी, बस आप खुद ही जज के सामने अपनी बात रख सकते हैं। प्रक्रिया बहुत सरल और अनौपचारिक होती है।
नेशनल लोक अदालत कब लगेगी?
यदि आपका कोई मामला अदालत में विचाराधीन है या आप कोर्ट जाने से पहले ही विवाद को सुलझाना चाहते हैं, तो इसके लिए कुछ आसान स्टेप्स का पालन किया जा सकता है।
– अपने नजदीकी जिला कानूनी सेवा प्रधिकरण या तहसील कार्यालय में जाकर संपर्क करें।
– अपने मामले को लोक अदालत की लिस्ट में शामिल करने के लिए एक आवेदन जरुर दें।
– फिर 14 मार्च को निर्धारित समय पर संबंधित अदालत में उपस्थित हों, जहां जज और मध्यस्थ दोनों पक्षों की बात सुनकर समझौता कराएंगे।
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