रैपिडो ने खुद को सिर्फ बाइक तक सीमित नहीं रखा है. कंपनी ने ऑटो-रिक्शा और कैब सेवाओं में भी विस्तार किया. इसका फायदा यह हुआ कि जो ग्राहक पहले सिर्फ बाइक के लिए ऐप खोलते थे, अब वे ऑटो और कार के लिए भी रैपिडो को ही चुन रहे हैं.
कंपनी ने ड्राइवरों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर दिया है.
फरवरी, 2026 में उबर के यूजर्स की संख्या केवल 3.8 करोड़ तक पहुंच पाई. वहीं, कभी मार्केट लीडर रही ओला के लिए हालात और भी चुनौतीपूर्ण रहे. ओला का यूजर बेस 3 करोड़ से घटकर 2.6 करोड़ पर आ गया है. बाइक टैक्सी न केवल कार के मुकाबले ट्रैफिक से जल्दी निकलती है, बल्कि इसका किराया भी कम होता है. इस वजह से रैपिडो की बाइक टैक्सी सर्विस खूब लोकप्रिय हुई है. कंपनी ने ड्राइवरों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर दिया कि आज बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों के हर गली-नुक्कड़ पर रैपिडो की मौजूदगी दिखती है.
अब ऑटो और कैब टैक्सी भी
रैपिडो ने खुद को सिर्फ बाइक तक सीमित नहीं रखा है. कंपनी ने ऑटो-रिक्शा और कैब सेवाओं में भी विस्तार किया. इसका फायदा यह हुआ कि जो ग्राहक पहले सिर्फ बाइक के लिए ऐप खोलते थे, अब वे ऑटो और कार के लिए भी रैपिडो को ही चुन रहे हैं. किफायती बिजनेस मॉडल और बेहतर सर्विस के दम पर रैपिडो अब उबर और ओला से सीधे हर कैटेगरी में लोहा ले रही है.
कम किराये ने रैपिडो के लिए बुस्टर का काम किया है. कॉलेज जाने वाले छात्र हों या दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, हर कोई कम खर्चे में सफर पूरा करना चाहता है. रैपिडो का किराया पारंपरिक कैब सर्विस के मुकाबले काफी कम होता है. इसी सस्ती और अच्छी सर्विस के फॉर्मूले ने इसे छोटे शहरों में भी लोकप्रिय बना दिया है.
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