दुनिया में सिर्फ कुछ ही देशों के पास परमाणु हथियार है। लेकिन अब किम जोंग उन एक ऐसा कदम उठाने की तैयारी में है जिसने अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर कोरिया अब अपनी परमाणु ताकत को जमीन और आसमान के बाद समुद्र तक पहुंचाने की तैयारी में है। इतना ही नहीं किम जोंग उन ने 10,000 टन वजनी नए रणनीतिक युद्धपोतों के निर्माण का भी खुलेआम ऐलान कर दिया है। दरअसल बता दें कि उत्तर कोरिया के नाम को बंदरगाह शहर में चोम नाम के युद्धपोत को नौसेना में शामिल किया गया। इस समारोह में किम जोंग उन ने बड़ा ऐलान करते हुए यह कहा कि देश की नौसेना को परमाणु क्षमता से लैस करने का कार्यक्रम तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है। किम के मुताबिक यह उत्तर कोरिया की परमाणु ताकत को और भी ज्यादा प्रभावी ऑपरेशन के लिए तैयार करेगा। चोहो कोई साधारण युद्धपोत नहीं है। यह करीब 5000 टन वजनी डिस्ट्रयर है और उत्तर कोरिया पहले ही यह दावा कर चुका है कि इसे उसके सबसे शक्तिशाली हथियारों से लेस किया गया है।
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किम जोंग उन इस जहाज का कई बार निरीक्षण कर चुके हैं। इसी साल अप्रैल में उन्होंने इसी श्रेणी के युद्धपोथ से क्रूज मिसाइल परीक्षण की निगरानी भी की थी। लेकिन किम जोंग उन का सबसे बड़ा ऐलान अभी बाकी था। क्योंकि अब बात सिर्फ यहां पर एक युद्धपोत की नहीं है बल्कि समुद्र में परमाणु ताकत उतारने की हो रही थी। किम जोंग उन ने ये कहा कि चो योंग के बाद जल्द ही कांग को नाम का एक और डिस्ट्रयर ऑपरेशन के लिए तैनात किया जाएगा और फिर एक के बाद एक 10,000 टन के रणनीतिक युद्धपोत लॉन्च किए जाएंगे। किम का लक्ष्य है कि उत्तर कोरिया हर साल ऐसे आधुनिक युद्धपोत बनाए जो मौजूदा जहाजों से भी ज्यादा शक्तिशाली हो और यहीं से दुनिया की चिंता बढ़ जाती है क्योंकि अगर उत्तर कोरिया भविष्य में ऐसे युद्धपोतों पर परमाणु क्षमता वाली मिसाइलें तैनात करने में सफल हो जाता है तो उसकी सैन्य पहुंच पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ सकती है और यही वजह है कि अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया की हर नई सैन्य गतिविधि पर करीबी से नजर रखते हैं। अब ऐसे में सवाल है कि आखिर उत्तर कोरिया को इसकी ज़रूरत क्यों पड़ रही है?
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बता दें कि उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताता रहा है। हाल ही में अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपने सैन्य आधुनिकरण और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को बढ़ाया है। किम जोंग उनका यह दावा है कि इन गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र को परमाणु युद्ध के कगार पर पहुंचा दिया है और यही वजह है कि उत्तर कोरिया अब जमीन आधारित मिसाइलों के साथ समुद्री क्षमता भी मजबूत करना चाहता है। वैसे उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम पहले ही दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौतियों में गिना जाता है। अनुमान है कि उत्तर कोरिया के पास 50 से 60 परमाणु हथियार मौजूद है। के पास हर साल छह से सात नए परमाणु हथियार बनाने लायक फिसाइल सामग्री भी है। उत्तर कोरिया प्लूटोनियम और अत्यधिक सर्वाधिक यूरेनियम का उत्पादन करता है जो परमाणु हथियारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इतना ही नहीं उसने कई ऐसी मिसाइलें भी बनाई है। बैलिस्टिक मिसाइलें भी विकसित की है जिसने दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। इन मिसाइलों की मारक क्षमता 15,000 कि.मी. से ज्यादा बताई जाती है। और अगर हम इसे देखें तो अमेरिका के मुख्य भूभाग तक ये पहुंच सकती है। यानी अब मामला सिर्फ मिसाइलों का नहीं रह गया है। अगर उत्तर कोरिया अपनी नौसेना को भी प्रभावी परमाणु क्षमता से लैस करने में अगर सफल हो जाता है तो उसकी सैन्य रणनीति एक नए स्तर पर पहुंच सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किम जोंग उन सिर्फ ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं या फिर उत्तर कोरिया अपनी रणनीति को जमीन और आसमान के बाद अब समुद्र तक ले जाने की तैयारी में है।
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