एफबीआई चीफ के तौर पर काश पटेल का सफर जितना तेजी से ऊपर चढ़ा, उनके निजी शौक और विवादों ने उतनी ही तेजी से उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब उन पर शराब के सेवन और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नाराजगी की खबरों के बीच उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन दावों पर सफाई देनी पड़ी है। हालांकि वॉशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में काश पटेल की पहचान एक ऐसे अधिकारी की है जो नियमों और प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना अपनी धुन में रहना पसंद करता है। पटेल की जीवनशैली में रंगीन मिजाजी और विचित्र शौक हमेशा से शामिल रहे हैं। उनकी इस शख्सियत का सबसे रोचक पहलू ‘कोच काश’ वाली छवि है। वकालत और सरकारी नौकरी के शुरुआती दिनों में वे स्थानीय हाई स्कूल की हॉकी टीम को ट्रेनिंग देते थे। कई बार वे पेंटागन या व्हाइट हाउस की महत्वपूर्ण बैठकों से सूट में ही हॉकी रिंक पहुंच जाते थे। खेल के प्रति यही दीवानगी हाल ही में मिलान ओलिंपिक के दौरान उनके लिए जी का जंजाल बन गई, जब वे अमेरिकी टीम के ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों के साथ बीयर पीते नजर आए। गर्लफ्रेंड के लिए सरकारी विमानों के इस्तेमाल पर भी विरोधियों के निशाने पर आ चुके हैं। फैशन सेंस का मजाक उड़ाते थे दोस्त मियामी में जब वे सरकारी वकील थे, तब उनके साथ काम करने वाले लोग आज भी उनके फैशन सेंस का मजाक उड़ाते हैं। वे अक्सर भारत से खास तौर पर सिलवाए गए सूट पहनते थे, जो अमेरिकी अदालतों के माहौल के हिसाब से काफी अलग दिखते थे। उनके साथ पहने गए रंग-बिरंगे और अजीब पैटर्न वाले मोजे गॉसिप का विषय बन जाते थे। अपनी बेबाकी के लिए मशहूर काश ने एक बार एक चैरिटी कार्यक्रम में फंड जुटाने के लिए खुद को ‘एलिजिबल बैचलर’ के तौर पर नीलामी के लिए भी पेश कर दिया था। इसके अलावा वे बच्चों के लिए किताब भी लिख चुके हैं। ‘द प्लॉट अगेंस्ट द किंग’ नाम की किताब में उन्होंने खुद को एक जादूगर (विजार्ड) के रूप में पेश किया। पिता को एक सूटकेस में संघर्ष करते देखा काश की जड़ों का गहरा नाता युगांडा और भारत से है। उनके पिता प्रमोद पटेल 1970 के दशक में तानाशाह ईदी अमीन के शासन से जान बचाकर न्यूयॉर्क भागे थे, तब उनके पास केवल एक सूटकेस और कुछ ही डॉलर थे। इसी संघर्ष से प्रेरणा लेकर काश ने अपनी पहचान बनाई। लोकप्रियता भुनाने के लिए अपना ब्रांड किया लॉन्च अपनी लोकप्रियता का लाभ उठाते हुए काश ने K$H नाम से अपना एक पर्सनल ब्रांड भी बाजार में उतारा है। इस ब्रांड के तहत वे टी-शर्ट, हुडी और टोपी जैसे कपड़ों से लेकर वाइन तक बेचते हैं। इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा उनके द्वारा स्थापित ‘काश फाउंडेशन’ में जाता है। हालांकि, इसे लेकर भी विवाद आ चुके हैं।
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