कर्नाटक में कांग्रेस नेता बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। वह दो साल में दूसरी बार मंत्री पद से हट चुके हैं। उन पर 89 करोड़ के घोटाले का आरोप है। नागेंद्र अगस्त की शुरुआत में ही कैबिनेट में दोबारा शामिल हुए थे, जब डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद संभाला था। इससे पहले 2024 में वह सिद्धारमैया की सरकार में मंत्री थे। मामला 2024 से जुड़ा, एक अफसर ने सुसाइड कर लिया था मामला कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित 89 करोड़ रुपये की अनियमितताओं से जुड़ा है। मई 2024 में निगम के अकाउंट्स ऑफिसर पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने एक नोट में फंड के अनधिकृत ट्रांसफर का आरोप लगाया था। जांच में निगम के बैंक खातों से बड़ी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई थी। नागेंद्र उस समय सिद्धारमैया सरकार में जनजातीय कल्याण मंत्री थे। विवाद के बाद उन्होंने जून 2024 में मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। अब डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद 3 अगस्त को उन्हें फिर कैबिनेट में शामिल किया गया था। BJP-JDS लगातार इस्तीफे की मांग कर रहे थे वाल्मीकि निगम मामले को लेकर नागेंद्र और कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया था। BJP और JDS ने मंत्रिमंडल में नागेंद्र की दोबारा एंट्री के बाद से ही उनके इस्तीफे की मांग की थी। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी निगम के फंड के कथित डायवर्जन से नागेंद्र का संबंध था। हालिया मानसून सत्र के दौरान दोनों दलों ने विधानसभा के अंदर और बाहर कई प्रदर्शन किए। हंगामे के कारण सत्र तीन दिन पहले ही खत्म कर दिया गया और 24 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। BJP और JDS ने 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक पदयात्रा निकालने का भी ऐलान किया है।
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