कर्नाटक के योजना और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को वाल्मीकि निगम घोटाले के आरोपों के चलते पद संभालने के 25 दिन के भीतर ही राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफे की घोषणा कर दी। इससे पहले नागेंद्र ने कहा था कि वह मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से मुलाकात करेंगे और प्रेस वार्ता में अपना फैसला बताएंगे। भावुक नागेंद्र ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आज मैं अपनी मर्जी से मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं।’’
नागेंद्र ने बताया कि उन्होंने शिवकुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
विपक्षी दल भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) नागेंद्र की मंत्रिमंडल में वापसी का विरोध कर रहे थे। इसी मुद्दे पर दो साल पहले भी उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। विपक्षी दल कर्नाटक राज्य महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में 89 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में नागेंद्र की संलिप्तता का आरोप लगा रहे थे।
नागेंद्र ने आरोप लगाया, ‘‘मनुवादियों (भाजपा की ओर इशारा करते हुए) ने मुझे निशाना बनाया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि देश में कोई आदिवासी व्यक्ति तरक्की करे।’’
नागेंद्र ने भाजपा द्वारा उन्हें निशाना बनाए जाने की तुलना रामायण में भगवान राम द्वारा शंबूक के वध से की। वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में शंबूक नाम के एक तपस्वी का जिक्र है। ग्रंथ के अनुसार, तपस्या करने की वजह से राम ने उनका वध कर दिया था।
नागेंद्र ने कहा कि वह अपनी पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहते थे और न ही राज्य की राजनीति में ‘‘मनुवादियों और घटिया सांप्रदायिक ताकतों’’ की साजिशों को हावी होने देना चाहते थे। कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों में भाजपा के विरोध प्रदर्शन के कारण मानसून सत्र को निर्धारित समय से तीन दिन पहले 24 अगस्त को अचानक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्ष ने एक से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी।
नागेंद्र ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों द्वारा दाखिल किए गए दूसरे आरोपपत्र में उनका नाम ‘‘जल्दबाजी में’’ शामिल किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘वाल्मीकि निगम घोटाले में मेरी कोई भूमिका नहीं है। क्या मैंने कहीं हस्ताक्षर किए या कोई निर्देश दिया?’’
नागेंद्र ने कहा कि वह विधायक पद से इस्तीफा देने और ‘‘जनता की अदालत’’ में जाने के लिए भी तैयार हैं।
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