सीरीज मुसाफिर कैफे देखने के बाद आपका भी वहां जाने का मन हुआ होगा। अगर हां, तो फिर मसूरी के झरीपानी कैसल चले जाइये। असली मुसाफिर कैफे वही है। चलिए आपको झरीपानी कैसल के बारे में सबकुछ बताते हैं।
झरीपानी कैसल को किसने बनवाया था?
झरीपानी कैसल का निर्माण 1932 में ब्रिटिश कंपनी क्राउन ब्रुअरीज (Crown Breweries) ने कराया था। उस समय इसे ब्रिटिश अधिकारियों और सैनिकों के लिए गेस्ट हाउस व रिट्रीट के तौर पर बनवाया गया था। आजादी के बाद यह प्रॉपर्टी पटियाला राजघराने के पास चली गई और उनके समर रिट्रीट के रूप में इस्तेमाल होने लगी। साल 2003 में बहरी परिवार ने इसे खरीद लिया और फिर इसे एक हेरिटेज बुटीक स्टे में बदल दिया। अब यहां पर टूरिस्ट ठहरने के लिए आते हैं।
खूबसूरत दिखता है यहां से नजारा
झरीपानी कैसल से आप दून घाटी, शिवालिक की हरी-भरी पहाड़ियां और देवदार-चीड़ के घने जंगलों का मनमोहक नजारा देख सकते हैं। यहां पर सनसेट भी देखने में मजा आता है। जब यहां से आप सूरज के ढलने का नजारा देखेंगे तो लगेगा जैसे कोई तस्वीर है, जिसे देख रहे हैं।
आस-पास घूमने के लिए क्या है?
झरीपानी कैसल से कुछ दूर पर ही झरीपानी वॉटरफॉल है, जहां झरना देखने के साथ आप ट्रेकिंग और नेचर वॉक का मजा ले सकते हैं। इसके अलावा जॉर्ज एवरेस्ट हाउस देखें, यह मसूरी के सबसे लोकप्रिय व्यू प्वाइंट्स में से एक है। यहां से हिमालय की चोटियों और दून घाटी का शानदार नजारा दिखाई देता है। इसके अलावा आप क्लाउड्स एंड और कंपनी गार्डन भी घूम सकते हैं। अगर आप झरीपानी कैसल में ठहरते हैं, तो 2–3 दिन का प्लान बनाएं।
मसूरी कब जा सकते हैं घूमने
जुलाई से सितंबर के बीच मसूरी की खूबसूरती देखने लायक होती लेकिन बारिश भी खूब होती है। अगर गाड़ी से आ रहे हैं, तो जाम और दुर्घटना होने का डर रहता है। अक्टूबर से नवंबर के बीच प्लान करते हैं, तो आप भीड़ से दूर सुकून भरी छुट्टियां बिता सकते हैं। इस समय मौसम साफ रहता है, जिससे दून घाटी और आसपास की पहाड़ियों के शानदार नजारे देखने को मिलते हैं।
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