अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस ने स्वीकार किया है कि जेफ्री एप्स्टीन से जुड़ी फाइलों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन जनता के सामने सही और स्पष्ट जानकारी पेश करने में पूरी तरह विफल रहा। बुधवार को प्रसारित जो रोगन के एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में वेंस ने इस पूरी स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने इस मामले में संचार की विफलता के लिए मुख्य रूप से पूर्व अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी को जिम्मेदार ठहराया।
पैम बॉन्डी ने पहले यह दावा किया था कि एप्स्टीन की कथित ग्राहकों की सूची (क्लाइंट लिस्ट) उनके पास मौजूद है। जेफ्री एप्स्टीन एक दोषी यौन अपराधी था, जिसके संबंध दुनिया की कई प्रभावशाली हस्तियों से थे। बॉन्डी के कार्यकाल के दौरान न्याय विभाग ने कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और टिप्पणीकारों को द एपस्टीन फाइल्स: फेज-1 और डिक्लासिफाइड जैसे शीर्षकों वाली फाइलें भी उपलब्ध कराई थीं।
वेंस ने साक्षात्कार के दौरान कहा कि वह बॉन्डी को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और पसंद करते हैं। उनका मानना है कि बॉन्डी ने जानबूझकर कुछ गलत नहीं किया, बल्कि वह उस समय के राजनीतिक माहौल के अनुसार प्रतिक्रिया दे रही थीं। हालांकि, वेंस के अनुसार उन्होंने प्रशासन के पास मौजूद जानकारी के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए, जिससे बाद में उन्हें कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी और लोगों का प्रशासन की पारदर्शिता पर भरोसा कम हो गया।
उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि एप्स्टीन फाइल्स को लेकर सूचना के प्रबंधन में निश्चित रूप से गड़बड़ी हुई, लेकिन इसके पीछे कुछ छिपाने की मंशा नहीं थी। पिछले साल यह विवाद ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहा था। अंततः सांसदों द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद सरकार को एप्स्टीन जांच से जुड़े बड़ी संख्या में दस्तावेजों को सार्वजनिक करना पड़ा।
दिसंबर के अंत में न्याय विभाग ने इन दस्तावेजों को जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी। सार्वजनिक किए गए इन दस्तावेजों में कॉल लॉग, तस्वीरें, ग्रैंड जूरी के सामने दी गई गवाही और पूछताछ के प्रतिलेख शामिल थे। वेंस के इस बयान ने एक बार फिर एप्स्टीन मामले में ट्रंप प्रशासन की कार्यप्रणाली को चर्चा में ला दिया है।
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