प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण: विश्वास पर आधारित शासन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस विधेयक के पारित होने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे जीवन यापन (Ease of Living) और व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बताया। ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने इस विधायी सुधार के मुख्य लाभों को रेखांकित किया:
विश्वास आधारित ढांचा: यह विधेयक सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास की नींव को मजबूत करता है।
अप्रासंगिक नियमों का अंत: पुराने और अप्रचलित नियमों को समाप्त कर शासन व्यवस्था को आधुनिक बनाया गया है।
न्यायिक बोझ में कमी: छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने (Decriminalization) से अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम होगा और मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित होगा।
व्यापक परामर्श: प्रधानमंत्री ने इस विधेयक के निर्माण में अपनाई गई गहन परामर्श प्रक्रिया की भी सराहना की।
पीएम मोदी ने विधेयक के मसौदे में अपने विचार साझा करने वाले तथा सदन में इसका समर्थन करने वालों की भी सराहना की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संसद में जन विश्वास विधेयक का पारित होना भारत के लिए जीवन और व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में एक ‘‘बड़ा कदम’’ है।
गृह मंत्री ने एक पोस्ट में कहा, ‘‘कई कानूनी प्रावधानों में कटौती करके, यह विधेयक प्रधानमंत्री मोदी के नए भारत के सपने को साकार करता है और सभी के लिए जीवन को आसान और व्यापार को सरल बनाता है।’’ छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने के लिए 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव करने वाले जन विश्वास विधेयक को बृहस्पतिवार को संसद की मंजूरी मिल गई।
निष्कर्ष
जन विश्वास विधेयक, 2026 का पारित होना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” (Minimum Government, Maximum Governance) के मंत्र पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। 784 प्रावधानों में संशोधन के माध्यम से, सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका उद्देश्य नागरिकों को दंडित करना नहीं, बल्कि एक सहयोगी और पारदर्शी वातावरण प्रदान करना है।
यह सुधार न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को सुधारेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर छोटे व्यापारियों और आम जनता को अनावश्यक कानूनी उलझनों से भी मुक्ति दिलाएगा।
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