मान्यता के मुताबिक पुरुषों की दाईं आंख फड़कना शुभ माना जाता है और महिलाओं की बाईं आंख फड़कना। लेकिन क्या साइंस भी ऐसा ही मानता है? आइए, आइए आंखों की स्पेशलिस्ट डॉक्टर अवनी से समझते हैं।
क्या कहती है साइंस
डॉक्टर कहती हैं कि आंख फड़कने से जुड़े सवाल उनसे बहुत ज्यादा पूछे जाते हैं। डॉक्टर कहती हैं कि साइंस के मुताबिक आंखों के फड़कने का गुड और बैड लक से कोई लेना देना नहीं है। मेडिकल भाषा में इसे आईलिड मायोकेमिया कहा जाता है। दरअसल आंखों की एक छोटी मांसपेशी में जा ऐंठन हो जाता है और आपके आईलिड्स पर ब्रेन से एक फेशियल नस आती है जो दिमाग को सिग्नल देती है और कई बार ये नस थोड़ी ओवरएक्टिव हो जाती है। जिसकी वजह से आंखे फड़कने लगती है।
आंखों के फड़कने की वजह
-कम नींद
-ज्यादा चाय या कॉफी
-बहुत ज्यादा स्क्रीन देखना
डॉक्टर कहती हैं कि कभी-कभी ऐसा न्यूट्रीशियन की कमी के कारण भी हो सकता है।
क्या वाकई आंख फड़कने पर चिंता की जरूरत है?
एक्सपर्ट कहती हैं कि आंखों का फड़कना कोई चिंता की बात नहीं है। कई बार आंखों का फड़कने से कोई नुकसान नहीं होता और कुछ ही घंटों में ये खुद से ठीक भी हो जाता है।
कब करें गौर
वैसे तो ये समस्या खुद से ठीक हो जाती है। लेकिन अगर आपको हफ्ते भर तक ऐसा लगे। या पूरा चेहरा हिलने लगे या फिर आंख ही बंद होने लग जाए तो ये एक समस्या की वजह से हो सकता है जो फेशियल ऐंठन से जुड़ी है। जिसमें आंखों के स्पेशलिस्ट या न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाना पड़ता है।
क्या हैं आंख फड़कने से जुड़ी मान्यताएं
दाहिनी आंख फड़कना- कुछ मान्यताओं में इस तरफ की आंख को फड़कना काफी शुभ माना गया है। कहते हैं कि जब इस तरफ की आंख फड़कती है तो अच्छी खबर या कुछ बड़ा फायदा होता है।।
बाईं आंख फड़कना- कुछ मान्यताओं में इसे अशुभ माना गया है। कहते हैं कि इस आंख के फड़कने को चिंता परेशानी का संकेत माना जाता है।
पुरुष और महिला के लिए अलग मतलब- कुछ भारतीय परंपराओं में पुरुष की दाहिनी आंख और महिला की बाईं आंख फड़कना शुभ माना जाता है। हालांकि किछ दूसरी परंपराओं में इसका उल्टा भी मिलता है।
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