अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति पर तीखी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध की स्थिति का गलत आकलन किया और संभव है कि उन्हें लगा हो कि वह जल्दी से रिजीम चेंज करवा सकते हैं, जैसा अमेरिका ने पहले वेनेज़ुएला में करने की कोशिश की थी. बोल्टन ने कहा कि अगर ट्रंप ने ऐसा सोचा था तो वह पहले भी गलत थे और आज भी गलत हैं.
हाल ही में दिए क्लैश रिपोर्ट को दिए गए एक इंटरव्यू में बोल्टन ने आरोप लगाया कि ट्रंप अक्सर बड़े फैसले बिना किसी योजना के लेते हैं. उनके मुताबिक ट्रंप का फैसला किसी तरह की रणनीतिक सोच पर आधारित नहीं होता बल्कि अचानक लिया गया होता है. बोल्टन ने कहा कि सैन्य अभियान जैसे बड़े फैसलों के लिए बड़ी योजना और अच्छी-खासी तैयारी की जरूरत होती है, लेकिन ट्रंप आम तौर पर ऐसा नहीं करते हैं.
तेल सप्लाई पर युद्ध का असर
ईरान के साथ जारी युद्ध अब दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है और खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं. इसका असर दुनिया की एनर्जी सप्लाई पर भी पड़ रहा है. इस दौरान होर्मुज से होने वाले ऑयल ट्रांसपोर्ट पर खतरा मंडरा रहा है. बोल्टन ने कहा कि यह खतरा पहले से स्पष्ट था और व्हाइट हाउस को इसकी तैयारी करनी चाहिए थी.
अमेरिकी सेना की तारीफ भी की
हालांकि ट्रंप की आलोचना करते हुए बोल्टन ने अमेरिकी सेना की कार्रवाई की तारीफ भी की. उनका कहना है कि सैन्य अभियान के दौरान ईरान की कई सैन्य क्षमताएं कमजोर हो चुकी हैं और उसके कमांड व कम्युनिकेशन सिस्टम को भी भारी नुकसान पहुंचा है.
फैसला ट्रंप का था, नेतन्याहू का नहीं
बोल्टन ने यह भी कहा कि यह कहना गलत है कि बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका को युद्ध में धकेला. उनके अनुसार यह फैसला पूरी तरह ट्रंप का था. बता दें कि ईरान के साथ युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए. इसके बाद ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमले शुरू कर दिए, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया और यह हाल के वर्षों का सबसे खतरनाक युद्ध में तब्दील हो गया.
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