खामेनेई की मौत से भी क्यों खुश नहीं है ये ईरानी फिल्ममेकर? | Image:
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काश उसे जीवित पकड़ा जा सकता… उसने धर्म और झूठी पवित्रता की आड़ में समकालीन मानव अस्तित्व के सबसे काले आयामों को इस तरह से मूर्त रूप दिया कि लाखों ईरानियों ने पीढ़ियों से, आने वाली पीढ़ियों तक, इसकी कीमत चुकाई है और चुकाते रहेंगे!
उसकी छाया में – जो अहंकार की खाई में गिरकर अपने ही मानसिक रूप से विक्षिप्त, बीमार और पवित्र संसार में डूबा हुआ था – धन और सत्ता की एक भ्रष्ट और विशाल संरचना का निर्माण हुआ। एक ऐसी संरचना जिसे इस नंगे राजा के खोखले आदर्शों के लिए मृत्यु का औद्योगीकरण करने का काम सौंपा गया था!
दुर्भाग्य से, यह स्वीकार करना होगा कि “खामेनीवाद” एक आंदोलन है! इस भ्रष्ट गिरोह का तांडव अवैध धन और सत्ता के उन मालिकों का समूह है जिन्होंने दशकों से ईरान की पूंजी और संसाधनों को हड़प रखा है और इस्लामी गणराज्य की भ्रष्ट संरचना के केंद्र में अपना खुद का पुनरुत्पादन तंत्र स्थापित कर लिया है!
स्वतंत्रता के कठिन मार्ग पर, अब नए दिन हमारा इंतजार कर रहे हैं…’
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
जैसे ही यह बयान सामने आया, सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। जहां कुछ लोग फिल्ममेकर की बात से सहमत दिखे। उनका कहना है कि जिंदा पकड़े जाने पर कई राज खुल सकते थे। वहीं कुछ लोग इसे गलत और संवेदनहीन बयान बता रहे हैं।
ईरान में पहले से ही राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण है। ऐसे में इस तरह के बयान और भी ज्यादा चर्चा का विषय बन रहे हैं।
लोगों के मन में क्या है?
खामेनेई लंबे समय से ईरान की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। उनके समर्थक उन्हें मजबूत नेता मानते थे, जबकि आलोचकों का आरोप था कि उनके शासन में कई सख्त फैसले लिए गए।
फिल्ममेकर का बयान दरअसल उन लोगों की भावनाओं को भी दर्शाता है, जो बदलाव चाहते थे। उनका कहना है कि एक ऐतिहासिक ट्रायल दुनिया को सच्चाई दिखा सकता था।
अब आगे क्या?
खामेनेई की मौत के बाद ईरान की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि देश के अंदर और बाहर दोनों जगह इस घटना पर चर्चा जारी रहेगी।
यह मामला सिर्फ एक नेता की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या सिर्फ अंत ही काफी है, या सच सामने आना ज्यादा जरूरी होता है?
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