छत्तीसगढ़ की पहली महिला IPS अधिकारी अंकिता शर्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के एक छोटे शहर की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की।
सरकारी स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई
अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के एक छोटे शहर की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में हमेशा शानदार प्रदर्शन किया। 10वीं बोर्ड में 92 प्रतिशत और 12वीं में 90 प्रतिशत अंक हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि सफलता के लिए सुविधाओं से ज्यादा मेहनत और लगन मायने रखती है।
सिविल सर्विस के लिए छोड़ दी MBA
ग्रेजुएशन के बाद अंकिता ने MBA में दाखिला लिया, लेकिन उनका सपना सिविल सर्विस में जाने का था। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने MBA की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और पूरी तरह UPSC की तैयारी में जुट गईं। शुरुआत में उन्होंने दिल्ली में रहकर तैयारी की, बाद में घर लौटकर अपनी रणनीति के अनुसार पढ़ाई जारी रखी।
दो बार मिली असफलता, फिर भी नहीं मानी हार
UPSC का सफर अंकिता के लिए आसान नहीं रहा। पहले प्रयास में वह मुख्य परीक्षा (Mains) में केवल 15 अंकों से चयन से चूक गईं। दूसरे प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) भी पास नहीं कर सकीं। लगातार दो असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया, तैयारी की रणनीति बदली और पहले से ज्यादा मेहनत के साथ तीसरे प्रयास में उतर गईं।
तीसरे प्रयास में मिली सफलता
साल 2018 में तीसरे प्रयास में अंकिता शर्मा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 203वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के साथ वह छत्तीसगढ़ की पहली महिला IPS अधिकारी बनीं। उनकी उपलब्धि ने राज्य ही नहीं, पूरे देश के युवाओं को प्रेरित किया।
नक्सल प्रभावित इलाकों में दिखाई बहादुरी
IPS अधिकारी बनने के बाद अंकिता शर्मा ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कई अहम अभियानों का नेतृत्व किया। अपने साहस, सख्त कार्यशैली और बेहतरीन नेतृत्व क्षमता के कारण उन्होंने अलग पहचान बनाई। उनके काम से नक्सलियों में भी खौफ का माहौल बना। इसी वजह से लोग उन्हें प्यार और सम्मान से ‘लेडी सिंघम’ कहकर बुलाते हैं। अंकिता शर्मा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ा जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।
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